Saturday, October 23, 2021

आज का विचार

अपने देश को नुकसान पहुँचा कर कोई राष्ट्र कभी आगे नहीं बढ़ सकता।

LIFESTYLE

आज का विचार
लोगों को कहने दो
रफ्तार जरूरी है

TECHNOLOGY

दूसरे की ताल पर गीत कोई क्यों लिखूँ..
मत रोको अब बह जाने दो
वो चिड़िया

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कहे दुलारी हँसकर भैया रामलली का डिब्बा गोल

मेरे घर में कोई न कोना?

मेरे घर में कोई न कोना दीवारों की गिनती बोल तीजी मंजिल बना तिकोना छत्तीस खिड़की घन बेडौल कहे दुलारी हँसकर भैया रामलली का डिब्बा गोल जितनी नाली जितने...

मैं उसकी आँख का पानी हूँ (शहीद उधम सिंह की आँखों देखी)

मैं उसकी आँख का पानी हूँ  बोलो कैसे मर सकता हूँ  उसकी पुरजोर जवानी हूँ  बोलो कैसे मर सकता हूँ है चॉक कलेजा सुनकर ही उसकी आँखों देखी गाथा रक्त...

वैदिक युग से शुरु हुई मैं संस्कृत प्राकृत की चेरी

वैदिक युग से शुरु हुई मैं संस्कृत प्राकृत की चेरी आर्य नादों में बजती थी मेरे सुर की रणभेरी  सिन्धु देश में अश्वमेघ सम छाप मिलेगी मेरी अपभ्रंश और अवधी...

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तलाश ए जिंदगानी में भटकना दरबदर मेरा मृगमरीचिका के संग रोज तय सफर होता है एक तरफ जान थी मेरी एक तरफ जान का टुकड़ा जलजला दोनों सूंं फैला क्या यही...
एक रात जब

Aàaaà

लौट आओ

लौट आओ ऐ परिंदो अपने आशियानों को इससे पहले कि  दर ओ दीवार न रहें

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OCD

ओ सी डी स्कूल में ऐसे ही छोटी सी बहस हो रही थी। साइंस टीचर श्याम सिंह के कथन पर सारे के सारे टीचर ठहाके...
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DearSanta….

चंद अशआर

सांझी

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पहली बारिश

पहली बारिश  सौंधी गंध रोज बरसात धुल गये छंद गुड़हल फूले चहुँदिस मकरंद पहली बारिश सौंधी गंध धुले घाट उखड़े बाट गाड़ी के छींटे...

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मेरे घर में कोई न कोना?

मेरे घर में कोई न कोना दीवारों की गिनती बोल तीजी मंजिल बना तिकोना छत्तीस खिड़की घन बेडौल कहे दुलारी हँसकर भैया रामलली का डिब्बा गोल जितनी नाली जितने...

मैं उसकी आँख का पानी हूँ (शहीद उधम सिंह की आँखों...

मैं उसकी आँख का पानी हूँ  बोलो कैसे मर सकता हूँ  उसकी पुरजोर जवानी हूँ  बोलो कैसे मर सकता हूँ है चॉक कलेजा सुनकर ही उसकी आँखों देखी गाथा रक्त...

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मत रोको अब बह जाने दो

मत रोको अब बह जाने दो एक समन्दर मन के अन्दर कतरा कतरा कह जाने दो मत रोको अब बह जाने दो मन की...

उपसर्ग और प्रत्यय जवाहर नवोदय प्रीति राघव चौहान

उपसर्ग और प्रत्यय  वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं।  उत्पत्ति के आधार पर शब्द के तीन भेद होते हैं। • रूढ़ • यौगिक...

TECH

टॉफ़ी नहीं कॉपी दिलवाएँ

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मेरे घर में कोई न कोना?

मेरे घर में कोई न कोना दीवारों की गिनती बोल तीजी मंजिल बना तिकोना छत्तीस खिड़की घन बेडौल कहे दुलारी हँसकर भैया रामलली का डिब्बा गोल जितनी नाली जितने...
मेरे घर में कोई न कोना प्रीति राघव चौहान

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दस्तक

दस्तक जीवन की मजारों पर अक्सर अनसुनी हो जाती हैं खुशनुमा दिनों की शमा हर रात पिघल जाती है मुरझा जाते हैं गुल सूखती स्मृति  से जीती जागती कुछ...

अरण्यरोदन

अरण्यरोदन आज से एक नया धारावाहिक उपन्यास शुरू करने जा रहे हैं। जिसका शीर्षक है- "अरण्य - रोदन” अर्थात जंगल में रोना या व्यर्थ की...
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इक सदी का सफर

इक सदी का सफर  चन्द लम्हों में है इस कदर तेज रौ हमने देखी अभी  हँसते गाते कदम  जो न ठहरे कभी वो हैं बेजां से बुत हमने देखे अभी सहमे सहमे...
आस्था का सूर्य उदय होते ही जग प्रकृति की हर शय खूबसूरत नज़र आती है।

आज का विचार

"आस्था का सूर्य  उदय होते ही जग प्रकृति की हर शय खूबसूरत नज़र आती है।"

वन्दे वसंत वन्दे वसंत

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   सुनो गुनगुन ये जो तुम्हारे पैरों तले बेरंग धूसर माटी है बचपन इसमें ही मिल हुआ करता है उर्वर आकाश के नील पटल पर रंगने से पहले सतरंगी इंद्रधनुष भरो...

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क्या आपको भी नहीं आती नींद? आज के लॉकडाउन पीरियड में लगभग तमाम महानगरों में ज़िन्दगी जैसे थम सी गई है। लोगों के पास अपने...

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बादलों के लिये जरूरी हैबो दें इक वन अपनी हथेलियों से देखना इन वनों से निकलेंगे अनगिनत हाथ जो पकड़ेंगे दौड़ते हुए...

Fog On The Mars

दस्तक जीवन की दस्तक जीवन की  मजारों पर  अक्सर अनसुनी हो जाती है  खुशनुमा दिनों के कई शमा  हर रात पिघल जाती है  मुरझा जाते हैं गुल  सूखती स्मृति से  जीती-जागती/...
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एक बार की बात है फोन हुआ बीमार परदे के पट बन्द थे बैटरी भी लाचार तरह-तरह के चार्जर तरह-तरह के तार जतन किए...
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मैंने जब भी तलाशे इक कंकर डाल रुके हुए पानी में अपनी उलझनों के हल मुझेअपनी उलझने वर्तुलाकार लगीं जितना तलाशा उतना  बढ़ाया सिलसिला यूँ कभी थमने ना पाया आज...
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सूरज बर्फ की ट्रे में

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धैर्य बनाए रखें... जैसे अच्छा वक़्त नहीं रहा बुरा भी नहीं रहेगा। 

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भागदौड़ में भूले जो वो भी तो कहना है बन्धु चुपके चुपके इतिहास रचा वो भी तो लिखना है बन्धु एक गाँव सड़क किनारे है बालक उसमें सब...
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