No more jokes on ladies…

स्वयं पर हंसे औरत पर नहीं

0
527

मैं औरत हूँ

हर सब्जी में मिल खुश

होना चाहती हूँ

क्या करूँ

उसने हरा जामा पहनाया

लगे अगर किसी को

मेरा क्या कुसूर

मैं भी सोई हुई थी..

अचानक जागरण हुआ

 क्या जीवन भर हम

 खुद पर हंसते रहेंगे??

अपने परमेश्वर को भी

ये मौका दें बहना

हर जगह औरत का

 मजाक ठीक नहीं ..

 आप बतायें सरकार को

आपकी सम्पत्ति क्या है

 बतायेंगी..???

संग है क्या जो कमाया..?

उसके बाद स्वयं पर

हंसी न आये तो कहना!!

 बाद उसके हर चुटकुला

 पढ़ कर सोचना…

क्या मैं ये हूँ..

क्या औरतें ऐसी होती हैं..?

तब तुम कहोगी

No more jokes on ladies……

VIAPritiraghavchauhan
SOURCEPritiraghavchauhan
SHARE
Previous articleकुछ अशआर.. ए..दिल
Next articleअशआर
नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

LEAVE A REPLY