मैंने हिंदू देखे मैंने मुसलमां देखे
मैंने हिंदू देखे मैंने मुसलमां देखे अपनी ही भूख से सारे पशेमां देखे
गाँव के जोहड़ दुकानों में तब्दील हैं ...
देता रहा दस्तक वो
बेसबब उसकी हर बात को लेते गये तयशुदा उसको लम्हात ही भेजे गये
देता रहा दस्तक वो खामोश सा चेहरा जज़्बातों को उसके तजुर्बात सा...
जरा मुस्कुराओ
वह अपने घर के सोफे में
ठीक ऐसे ही टँकी थी
जैसे उसके पीछे टँगी तस्वीर
जो मुस्कुराकर झांक रही थी मेज में
मुस्कुराती तस्वीर
सचमुच गजब ढा रही...
पढ़ेगा भारत तभी तो बढ़ेगा भारत
आज बहुत जोशोखरोश के साथ विद्यालय के लिए तैयार हुई ।लंबी छुट्टियों के बाद एक शिक्षक के लिए स्कूल जाना ठीक ऐसे ही होता...
आज का विचार
मैं कब किस के काम आया
मेरा जनाज़ा बताएगा
कांधिये कितने थे पीछे
और कैसी जमात थी
Ajaadi
आजादी
नादान है वह
नहीं जानती आजादी
आजादी के मायने
अभी उसके डैने छोटे हैं
उसकी उड़ान
हवाओं का रुख नहीं पहचानती
उसे नहीं पता युद्ध और पाकिस्तान में अंतर
क्या जरूरी...
पहाड़ ने कहा जरा रुको
पहाड़ ने कहा
ज़रा रुको
वह कब किसी के रोके रुकी
ठिठककर मुस्कुराई
फिर उठी आसमान की ओर
मिलकर आसमां से
बरस गई हवा
सारे पहाड़ /सारी धरती
छा गई पाताल तक
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