मेरे जेहन में रिश्तों की जो परिभाषा थी

वो बदल दी उसने जिसे खुदा से मांगा

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इस दफा हिसाब सही

जो निकले गुणा भाग कर

जब मेरी बारी आयेगी

मत कहना आज माफ कर

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 लड़खड़ाते कदमों को संभालो बच्चों

 निशां अपनों के कल हवा में न ढूंढा करना

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सितारों सी बुलंदी पर रहा होगा तभी शायद

नदियों से समन्दर तक उसी का अक्स है प्यारे 

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VIAPriti Raghav Chauhan
SOURCEप्रीति राघव चौहान
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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