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घर वापसी नहीं कठिन है
घर तो बच्चों घर होता है
आंखें खोलो बांछेंं खोलो
ऊँचा तुमसे सर होता है
चाहे जितने मेले घूमो
मेला...
कुछ शेर dil se
क्यों इतनी उलझने क्यों इतने फासले हैं
गैर से लगने लगे अपनों के काफिले हैं
कारवां लिए एक गुबार साथ चल रहा
कैसा है यह सफर कैसे ...
तिनका
तिनका
तितलियों से रंग ले
वो उड़ती पात पात पर
मुस्कुराती झूमती
समय की बिसात पर
मुट्ठियाँ कसी हुई
हौसले बुलंद थे
लाल लाल अधरों पर
रौशन हजारों छंद थे
तेजस्विनी के भाल...
OCD
ओ सी डी
स्कूल में ऐसे ही छोटी सी बहस हो रही थी। साइंस टीचर श्याम सिंह के कथन पर सारे के सारे टीचर ठहाके...
लोगों को कहने दो
आप हँसना चाहते हैं
जोर से चिल्लाना चाहते हैं
चाहते हैं सड़क किनारे खाना कुलचे
चाहते हैं सिस्टम पर लगाना पंच
दिन भर की भगदौड़ से परे
चाहते हैं...
मैंक्यों रुकूँ???
मैं क्यों रुकूँ, मैं क्यों झुकूँ..
दूसरे की ताल पर गीत कोई
क्यों लिखूँ
माना बड़ी उड़ान है
...
Guest.. Maina
क्या आपने सुना हुज़ूर
मैना ने सर मुंडवाया है
वो एक सैनिक की बेवा है
संग सैनिक का साया है
पीछे उसके अतिथिगण
की भरी पुरी एक सेना है
जल्दी...



















