श्वेतलाना
एक जंगल था। सावन - भादों में तो बहुत ही घना और हरा-भरा हो जाता था। उस जंगल में बहुत सारे मलबरी यानी शहतूत...
कागज़ की नाव
कागज की नाव..
रात भर बादलों ने
जमकर किया नृत्य
हर छत-हर पात पर
कुछ इस तरह कि
सूरज खुलकर मुस्काना भूल गया
बस धीरे-धीरे भीगी
हर चीज़... हर कोना... हर...
मशरूम जो बदल देगी जीवन
आयस्टर मशरूम की खेती एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसे छोटे निवेश के साथ भी शुरू किया जा सकता है। यह मशरूम अपनी पौष्टिकता, स्वाद...
जमाने के चलन देखे
जमाने के चलन देखे PritiRaghav Chauhan जमाने के चलन देखे नई कविता
जमाने के चलन देखे
जमाने के चलन देखे
PRITI RAGHAV CHAUHAN
जमाने के चलन देखे
खिले साहब...
धरती
धरती धरती
कल मैं जमीन पर बैठी थी
माँ बोली! धरती पर क्यों बैठी हो?
अभी वसुधा पर ओस है।pritiraghavchauhan.com
मही अभी नम है।
उर्वी से उठो, क्षिति!
धरित्री को...
पानी
पानी.. पानी
पानी
हुई पुरानी ताल-तलैया,
हुए पुराने कुएं जी।
नल ही नल हैं अब तो घर-घर
कहाँ रहे वो झरने जी।
पानी ले जाती पनिहारिन
हवा न जाने कहाँ हुई
बोतल...
काशी में शिक्षा
नव भारत ने पकड़ ली
अब विकास की राह,
वाराणसी में दिखा
शिक्षा का नया प्रवाह।
देखे हमने विद्यालयों में
नवजागरण स्वर,
निपुण भारत का सपना
हर बच्चा हो आत्मनिर्भर
कार्यकलापों से...
काशी के बुनकर
हंथकरघा जहाँ गाता धुनों का राग,
हर ताना-बाना कहता है दिल की बात।
सूरज सी रेशम किरणों से बुनकर के वो खेल,
मेहनत और कारीगरी का अविरत...


















