कहे दुलारी हँसकर भैया रामलली का डिब्बा गोल
प्रीति राघव चौहान /मेरे घर में कोई न कोना

मेरे घर में कोई न कोना

दीवारों की गिनती बोल

तीजी मंजिल बना तिकोना

छत्तीस खिड़की घन बेडौल

कहे दुलारी हँसकर भैया

रामलली का डिब्बा गोल

जितनी नाली जितने पाईप

सबके सब बेलन से गोल

आठ इंची और डेढ़ इंच के

दिखता नहीं कहीं भी होल

कहे दुलारी हँसकर भैया

रामलली का डिब्बा गोल

घर के अन्दर माचिस जैसे

हर तल्ले पर बैड हैं चार

सीढ़ी घर के बाहर बाहर

छःइंची हैं अपरम्पार

कहे दुलारी हँसकर भैया

रामलली का डिब्बा गोल

हर तल्ला है बारह फुटिया

हर तल कितनी खिड़की बोल

त्रिज्या इसकी दस फुटिया है

कितनी सीढ़ी इसमें बोल?

कहे दुलारी हँसकर भैया

रामलली का डिब्बा गोल 

VIAPritiRaghavChauhan
SOURCEप्रीति राघव चौहान
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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