टॉफ़ी देकर खुश करते हो

मुझको कॉपी लाकर दो

बहुत हुये अब उतरे कपड़े

मुझको वर्दी लाकर दो

हाथ गाड़ियाँ  बहुत चलाई
बालू महल बनाये खूब
ढक्कन डिबिया जोड़ लिये हैं
स्लेट और बत्ती लाकर दो

नहीं जानते कैसे दाखिल
करना है विद्यालय में
माई बाबू ईंट ढो रहे 
मुझको बस्ता लाकर दो

मैं खुद जाकर टीचर जी से
कह दूंगी दाखिल कर लो
मेरे सारे ढक्कन लेकर
मुझको भी साक्षर कर दो
प्रीति राघव चौहान

VIAPriti Raghav Chauhan
SOURCEप्रीति राघव चौहान
SHARE
Previous articleचलो आज तितलियों का जिक्र करें कैप्शन जोड़ें
Next articleमौन
नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

LEAVE A REPLY