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कमज़र्फ आंधी ले उड़ी ऊंचे सभी मरकज़ प्रीति राघव चौहान
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बूहे खोल ना माड़ी
pritiraghavchauhan.com
-
April 25, 2020
0
बूहे खोल ना माड़ी धूल राहों की काबिज है जहाँ की धूलि में खेला उसी में मिलने आया हूँ परिंदा था मैं आवारा परवाज़े न...
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