माँ मैं आ गई
लो माँ वक्त से पहले ही
चली आई मैं
पर भाई की तरह
ना छकाया
ना रुलाया
ना सताया
ना साज
ना आवाज़
ना ढोल ताशे
ना बनी सबकी सरताज
जो भी आता...
संजय तुम कहाँ हो
संजय तुम कहाँ हो
ज्येष्ठ माह
जब सर ढक कर चलना
मजबूरी हो जाती है
उसी ज्येष्ठ माह में
पहले एक विधवा ने
अपना सर मुंडवाया
भीड़ रोई प्रजातंत्र मुस्कुराया
अब हरियाणा...
Mirage/मृगमारीचिका/ग़ज़ल
तलाश ए जिंदगानी में
भटकना दरबदर मेरा
मृगमरीचिका के संग
रोज तय सफर होता है
एक तरफ जान थी मेरी
एक तरफ जान का टुकड़ा
जलजला दोनों सूंं फैला
क्या यही...
Turn to Home
घर वापसी नहीं कठिन है
घर तो बच्चों घर होता है
आंखें खोलो बांछेंं खोलो
ऊँचा तुमसे सर होता है
चाहे जितने मेले घूमो
मेला...
आज का विचार
आज ऐसा क्या है जो कल से बेहतर है ?
यदि प्रतिदिन आप ऐसी दो बातें ढूंढ लेते हैं तो यकीन मानिए आप निरन्तर प्रगति कर...
औरतें कांधे पर ले संसार साथ चलतीं हैं
औरतें कांधे पर
औरतें कांधे पर ले
संसार साथ चलतीं हैं
घर संग समूचा ले
कारोबार साथ चलती हैं
औरतें कांधे पर ले
संसार साथ चलतीं...
कुछ शेर dil se
क्यों इतनी उलझने क्यों इतने फासले हैं
गैर से लगने लगे अपनों के काफिले हैं
कारवां लिए एक गुबार साथ चल रहा
कैसा है यह सफर कैसे ...
मोनालिसा
मोनालिसा
तुम अपने घर के सोफे में
ठीक यूँ टंकी थी
जैसे तुम्हारे पीछे टँकी
मोनालिसा की तस्वीर
जो मुस्कुराकर झांक रही थी
सामने रखी मेज में
सचमुच गजब ढा रही...
छुट्टियाँ
छुट्टियाँ
छुट्टियाँ शुरु होते ही मन बल्लियों उछलने लगता हैं। ढेरों योजनाएं बनाई जाती हैं। हर बार की तरह छुट्टियों में भी बहुत सारे काम...


















