चलो इक बार फिर बैठें बतियाएं

http://pritiraghavchauhan.com चलो इक बार फिर बैठें बतियाएं तुम ही तुम कहो निहारूं मैं दूर तलक हम चलें साथ साथ रास्ते के कांटे तेरे बुहारूं मैं रुक कर देखो कनखियों से तुम नज़र तुम्हारी नज़रों से  उतारूं...

मनाली…

पुकारता है व्यास का  वो किनारा बार बार आँखों में तैरते हैं वो उनींदे देवदार खर्शू पर काई सा छोड़ कर आया हूँ मन...

उपवास क्यों रखें?

उपवास तन और मन दोनों को पुनर्जीवित करने वाला और ऊर्जा का भंडार प्रदान करने वाला बहूमूल्य उपाय है .. उपवास आप सप्ताह में...

मासिकधर्म धर्म में बाधा क्यों?

मासिक धर्म के समय स्त्रियों को रसोईघर से दूर रखें, धार्मिक कार्यों से दूर रखें.... ये पुरातनपंथी विचारधारा है। आज जहाँ कहीं शिक्षा का...

राधा भूखी ना हतै…

“आज तो छुट्टी है, चलो आज पूरी सब्जी बनाएँ..”, मुकुंद ने रचना से कहा। “ठीक है गैस भी नहीं है, इंडक्शन पर पूरियाँ आसानी...

जब परिस्थितियाँ विपरीत हों, क्या करें?

जब परिस्थितियाँ विपरीत हों क्या करें ?  प्रीति राघव चौहान   है बहुत अंधेरा कंदीलें जला लो यारों  घटा ने चांद छुपाया है हौंसला नहीं  ...

फोनवा भये बीमार

एक बार की बात है फोन हुआ बीमार परदे के पट बन्द थे बैटरी भी लाचार तरह-तरह के चार्जर तरह-तरह के तार जतन किए...

Anger Management..

क्रोध किसी क्रिया की प्रतिक्रिया मात्र होता है। सामने खड़ी विपरीत परिस्थितियों की दीवार पर अपने क्रोध की जोर आजमाइश करने से बेहतर है...

Red light begger

 घर से था निकला मौजे जुनूँ में  किस हाल में है चलो ये भुला दें हाथों में देकर उसके किताबें  उसे पाठशाला में दाखिल करा दें बच्चा ही...

भिखारी

घर से था निकला मौजे जुनूँ में किस हाल में है