कभी नफरतों के चलते
कभी नफरतों के चलते
मैं हो गया किसी का
कभी चाहतों ने बढ़कर
बुला लिया मुझे
कभी सरेराह यूं ही
साथ नहीं छूटा
कभी दूर जा कर राह ने
रुला दिया मुझे
Kabhi Zindagi se Milo
कभी ज़िन्दगी से मिलो जो तुम
उसे इत्तला करना ज़रूर
कभी मैं खफा कभी वो खफा
कितनी दफा मरना हुज़ूर
जो सुबह मिली तो थी धानी सी
सरे शाम से थी सयानी सी
परिजात सी मैं बिखर गई
गिला आज भी...
टॉफ़ी नहीं कॉपी दो
टॉफ़ी देकर खुश करते हो
मुझको कॉपी लाकर दो
बहुत हुये अब उतरे कपड़े
मुझको वर्दी लाकर दो
हाथ गाड़ियाँ बहुत चलाई
बालू महल बनाये खूब
ढक्कन डिबिया जोड़ लिये हैं
स्लेट और बत्ती लाकर दो
नहीं जानते कैसे दाखिल
करना है विद्यालय...
चलो आज तितलियों का जिक्र करें कैप्शन जोड़ें
चलो आज तितलियों का ज़िक्र करें
ज़िन्दगी वो भी हुआ करती थी
सपने में टॉफी
कहानियों में जलेबी के पेड़
दिन भर उछलकूद
गुड़िया गुड्डों की बारातें
खाकर पीकर मौज मनाकर
लड़कर गुड़िया वापस लाते...















