LATEST ARTICLES

कहे दुलारी हँसकर भैया रामलली का डिब्बा गोल

मेरे घर में कोई न कोना?

मेरे घर में कोई न कोना दीवारों की गिनती बोल तीजी मंजिल बना तिकोना छत्तीस खिड़की घन बेडौल कहे दुलारी हँसकर भैया रामलली का डिब्बा गोल जितनी नाली जितने पाईप सबके सब बेलन से गोल आठ इंची और डेढ़ इंच के दिखता...

मैं उसकी आँख का पानी हूँ (शहीद उधम सिंह की आँखों देखी)

मैं उसकी आँख का पानी हूँ  बोलो कैसे मर सकता हूँ  उसकी पुरजोर जवानी हूँ  बोलो कैसे मर सकता हूँ है चॉक कलेजा सुनकर ही उसकी आँखों देखी गाथा रक्त से लथपथ वाणी हूँ  बोलो कैसे मर सकता हूँ    ये हाहाकार मचा...

वैदिक युग से शुरु हुई मैं संस्कृत प्राकृत की चेरी

वैदिक युग से शुरु हुई मैं संस्कृत प्राकृत की चेरी आर्य नादों में बजती थी मेरे सुर की रणभेरी  सिन्धु देश में अश्वमेघ सम छाप मिलेगी मेरी अपभ्रंश और अवधी से  आरंभ है गाथा मेरी  अट्ठारह हैं बोलियाँ संग साथ जो मेरे खेली कह...
नीलोफ़र सुपुत्री श्री जमशेद खान

मेवात की बेटियाँ रच रहीं इतिहास

भागदौड़ में भूले जो वो भी तो कहना है बन्धु चुपके चुपके इतिहास रचा वो भी तो लिखना है बन्धु एक गाँव सड़क किनारे है बालक उसमें सब प्यारे हैं बस रस्ता दिखलाना है वो शिक्षा दूत हमारे हैं कोरोना काल...