क्या है काशी?

जब जीवन ने पहली साँस ली, गंगा के तट पर काशी बसी। संस्कारों का दीप जला, ज्ञान की गंगा यहाँ बही।   हर गली में इतिहास गूँजता, हर कोने में हैं वेद बसे। संतों के चरणों की रज में, जीवन का सार...
काशी

काशी

  काशी, तू है समय का शाश्वत स्वर, तू ही आरंभ और तू ही अंतिम पहर।   यहाँ जन्म की पहली पुकार सी गंगा की धार में शाश्वत सृष्टि झलकती। सतत प्रवाह में जीवन का संगीत, काशी, जहाँ सृष्टि और शून्य...

वाराणसी मैं आ रही हूँ!

  चाहती हूँ भारत को करीब से देखना, उसकी आत्मा को छूना, ब्रह्मपुत्र के उद्गम से, नर्मदा की हर धार तक बहना।   चाहती हूँ कावेरी की लहरों में गहराई ढूंढना, और गंगा की धारा में सदियों का इतिहास पढ़ना।   अस्सी के घाटों पर बैठकर हर...

निपुण भारत के निपुण कलाकार

भांति - भांति के देख गजानन  बचपन पर अभिमान हुआ रंग बिरंगी थाली लड्डू संग मूषक आह्वान हुआ कृष्ण सिरहाना लिये गाजरी लेटे थे बेफिक्री से  सिंहवाहिनी दुर्गा को देख ईश का भान हुआ शिवलिंग भी था इक कोने में साथ बनी तलवार...

दीपावली

इस बार जला कर मन का दीप  हरना तमस स्वयं का, समस्त ब्रह्मांड में भारत की अनंत, शाश्वत ज्योति हो। इस बार मनदीप जला, हरना तमस स्वयं का। ना केवल दीवारों पर टिमटिमाती रोशनी, ना केवल दीपों से सजे द्वार, इस बार भीतर...
चंचल चीता चला चमोली

Tounge Twister inCodeMix

चंचल चीता चला चमोली चंचल चीता चला चमोली,  चूहों ने चबा ली चाट, चूहे बोले चीते भैया,  छोड़ो चटपटी बात! चंचल चीता चुपचाप चपरम चिप्स चबाए, चूहे चिपचिप चिपाते,  चटपटी चाट में आए। बिल्ली बैठी बाल बनाकर,  बोली बैंगन लाओ बबून Baboon बोला बबल बबल,  Bull...

पढ़ो आगे बढ़ो

बच्चों तुमको पढ़ना है  सबसे आगे बढ़ाना है  हर दिन मेहनत करनी है  तारों सा तुम्हें चमकना है  बच्चों तुमको पढ़ना है  सबसे आगे बढ़ना है  हर पन्ने में नए रंगों से  नए गीत को रचना है  ज्ञान किताबों से लेकर  सपनों का...
दीप

दीप

अन्तरतम का अंधियारा जो दूर भगा दे, मन के भीतर ऐसा तुम एक दीप जलाओ। बुझी-बुझी सी राहों को  जो रोशन कर दे, अंधकार को मिटा  ज्ञान का सूर्य उगाओ अन्तरतम का अंधियारा जो दूर भगा दे, मन के भीतर ऐसा...

आत्मविश्वास की उड़ान

कविता: "आत्मविश्वास की उड़ान" तू क्यों डरती है ऐ नारी, तुझमें जब शक्ति छिपी सारी  बेशक है ये अंजानी सी, तू स्वयं तो है पहचानी सी। तूफानों से क्या घबराना, है रोज नया तूफां आना, बस झुकना नहीं  कभी रुकना नहीं तेरी...

हिन्दी वीरों की बोली

हिंदी वीरों की बोली हिंदी वीरों की है बोली, कितनी इसने गाथा खोली। रणभूमि में जो गरजे सिंह से , उनकी भाषा हिंदी बोली। राणा, शिवा, लक्ष्मीबाई, सिंह गर्जना करते आए। हिंदी के शब्दों से सजी, उनकी तलवारें चमक उठाए। धरती की ललकार...