हिंदी वीरों की बोली

हिंदी वीरों की है बोली,

कितनी इसने गाथा खोली।

रणभूमि में जो गरजे सिंह से ,

उनकी भाषा हिंदी बोली।

राणा, शिवा, लक्ष्मीबाई,

सिंह गर्जना करते आए।

हिंदी के शब्दों से सजी,

उनकी तलवारें चमक उठाए।

धरती की ललकार है ये,

मातृभूमि का है सम्मान ।

वीर जवानों के होठों पर,

हिंदी का ही है अभिमान ।

स्वतंत्रता के शंखनाद से ,

हिंदी ने सबको जोड़ा ।

विजय पताका बन भारत की,

हिंदी ने हटाया हर रोड़ा ।

वीरों की ताकत हिन्दी

साहस की भाषा हिन्दी

हिंदी में गूँजे हिंदुस्तान।

जय हिंदी, जय वीर जवान,

VIAप्रीति राघव चौहान
SOURCEPRITI RAGHAV CHAUHAN
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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