मैंक्यों रुकूँ???

मैं क्यों रुकूँ..

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मैं क्यों रुकूँ, मैं क्यों झुकूँ.. 

दूसरे की ताल पर गीत कोई 

क्यों लिखूँ

             माना बड़ी उड़ान है

             उलझा आसमान है

             उस छोर पर हैं रश्मियाँ

              उससे पहले क्यों रुकूँ

मैं क्यों रुकूँ, मैं क्यों झुकूँ.. 

             विनीत मैं ही क्यों रहूँ

              नमित मैं ही क्यों रहूँ

             नंगी आदमबस्तियों में 

               चेहरा अपना क्यों ढकूँ

   मैं क्यों रुकूँ, मैं क्यों झुकूँ.. 

            ये लाल लाल बिंदिया

            ये सुर्खियाँ लगाऊँ क्यों

             भाल ऊँचा है मेरा 

             लटों से छिपाऊँ क्यूं 

 मैं क्यों रुकूँ, मैं क्यों झुकूँ.. 

              मुझे मेरी उड़ान दो

              पूरा आसमान दो

              बेशक बन कल्पना

              मध्यमंडल में जलूँ

मैं क्यों रुकूँ, मैं क्यों झुकूँ.. 

              प्रीति राघव चौहान 

       

               

           

VIAPriti Raghav Chauhan
SOURCEPriti Raghav Chauhan
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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