Earth day

0
470

हरी धरा को देख गगन

मंद मंद मुस्काता है

जूही और चंपा के संग

धरणी दिवस मनाता है

निर्मल जल से निकल निकल

जल परियाँ हर्षाती हैं

जुगनू और फूलों के संग

बातें खूब बनातीं हैं

धरती के संग चंदा भी

सबको यह समझाता है

तुम सब की शीतलता से

मेरा भी तो नाता है

चहुँ ओर हरियाली हो

और सदा खुशहाली हो

फल फूलों से भरी हुई

वसुधा की हर डाली हो

“प्रीति राघव चौहान”

SHARE
Previous articleमोदी के बहाने
Next articleJust fly just fly
नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

LEAVE A REPLY