औरतें जब बैठती हैं.. 

 औरतें जब बैठती हैं एक साथ

चंद पल फुर्सत के निकाल

मुस्कुराती हैं हँसती हैं

चहकती हैं फफकती हैं

और कभी-कभी

शोलों सी धधकती हैं 

औरतों के किस्सों में 

सिर्फ सिरफिरी किस्सागोई नहीं होती 

रसोईघर से राजनीति 

कसौटी घर घर की से शुजूका पोकेमान 

अजान से केदारनाथ 

गूगल से डिस्कवरी तक

पूरा ब्रह्मांड छिपा होता है 

गहरे भेद छिपा जाने वाली ये नारियाँ

ज़िन्दगी के लम्हों को लम्हा लम्हा पीती हैं 

औरतें जब बैठती हैं एक साथ… 

चटकीली भड़कीली नखरीली सुरीली

रौबीली छबीली अलबेली नवेली 

नित नई पहेली सी ये हमजोलियाँ

जब कभी बैठती हैं बना पांत

धरती से अंबर तक तय सफर करतीं हैं 

रोज़ ब रोज़ नई बहर करती हैं 

संजली की बातों पर आह 

बोगीबील पर वाह 

प्रियतम के किस्सों पर लजा जाती हैं 

मोदी पर कुछ भी कहने से बचती हैं 

छोटी छोटी बातों पर बेसाख्ता हँसती हैं 

इन औरतों की कोई जात नहीं होती 

और तो और औकात नहीं होती 

राधा और रुबी

रुक्मिणी और रशीदा

कमला और गायत्री 

बलविंदर और हमीदा

हौले से मिला हाथ

या सिर्फ कनखियों से

कितना कुछ कह जातीं हैं 

रोज़ नई विधा बन सामने आतीं हैं 

                           “प्रीति राघव चौहान” 

VIAPriti Raghav Chauhan
SOURCEPriti Raghav Chauhan
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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