शुभकामनाएं /हो भविष्य उज्ज्वल ही उज्ज्वल

हो भविष्य उज्ज्वल ही उज्ज्वल

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हो भविष्य उज्जवल ही उज्जवल
शुभकामना देता ये अंतस्तल                      गंगा सा मन रहे आपका
दुग्ध धवल निर्मल और निश्चल

आज जो है होगा वह कल कल                       समय यूं ही हो जाता ओझल
जो छोड़े सुधियों के तारे
उन्हें समेटेगा ये अंचल

सिस्मित विभा सा रहे मुखमंडल
नयनों से झलके प्रमनजल
प्रगति लहरों में हंसों सा
प्रियवर यूँ ही तू बढ़ता चल

स्वप्न हो साकार झिलमिल
रहे जगमग साल झिलमिल                      कभी ना रूठे यह धरती नभ                            मिले खुशियां अपार अविरल

VIAPriti Raghav Chauhan
SOURCEप्रीति राघव चौहान
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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