मिनी पाकिस्तान 

         कागज़ पर खिंची लकीरें 

        चाक दिल ओ जान हुए 

          इधर केसरिया हिन्दू

          उधर मुसलमान हुए 

   उल्टे सीधे तवों पर  

   रोटियाँ सिकती रहीं

   खंड खंड हो गए

   नामे हिन्दुस्तान हुए 

           गाफिल रहे जहां से 

           जहालत में रहे डूबे 

           किलकारियों से उनके 

           घर गुलिस्तान हुए 

  भूख इस कदर थी

  पहाड़ चबा डाला

  बेबसी ऐसी कि

  खुद नख़्लिस्तान हुए 

          रजिया से रिजवाना 

          कासिद से सुलेमान तक

         आधार के चक्कर में 

         इंसान से इम्तिहान हुए

   इल्म चाहिए बस

   हुनर बखूबी है 

   डरे हुए बाशिंदे

   मिनी पाकिस्तान हुए.. प्रीति राघव चौहान…

 

          

          

VIAPriti Raghav Chauhan
SOURCEPriti Raghav Chauhan
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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