आधी आबादी

आधी आबादी

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आधी आबादी..

हिजाब में, घूंघट में, साड़ी में,

दुपट्टे में लिपटी है, लिपटी रहे!

क्या फर्क पड़ता है?

मुट्ठी भर आवारा महिलाओं

की आसमानी उड़ान से

जो परकटी, गोनकेश,अनोखे वेश में डॉक्टर इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षिका हैं..

जिन्हें लगती है गर्मी – सर्दी

जिन्हें आता है पसीना

और जो रखती हैं दिमाग

जो हैं आत्मनिर्भर…

पहले भी रहीं हैं

लेकिन बढ़ी नहीं!

ये आवारगी भारत में कभी

बढ़ेगी भी नहीं

ईरानी महिलाओं जितना

आवारापन कहाँ?

भारतीय महिलाओं में!

माँ दुर्गा, गार्गी, इंपाला,

सावित्री बाई फुले, कल्पना चावला, इंदिरा गांधी, किरण बेदी, सुषमा स्वराज…

नाम बहुत हैं पर मुट्ठी भर…

 

ये आधी आबादी जी सकती है

दो टुकड़ों पर

क्योंकि लिहाफ, हिजाब, और पर्दे

के बीच जीते जी भूल चुकी हैं

ये कि इनके पास भी हैं

दो हाथ, दो पैर, एक दिमाग

पुरुषों जैसा

और सबसे बढ़कर

संतति का वर…

नई सृष्टि का आधार …

जागो!

डर से निकलो,

घूंघट और हिजाब के विरुद्ध

भय तमाम त्यागो।

 

 

VIAPRITI RAGHAV CHAUHAN
SOURCEPritiRaghavChauhan
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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