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बोलो रानी/जीजिविषा
जीजिविषा रोज रचती है
आड़ी तिरछी लकीरों से
काले नीले लाल पीले
सतरंगी सुनहरे पल…
रास्तों की कालिख
धोने को हाथ हैं
मशीन भी...
नाचें अंबर और गुड़िया/बारिश /बाल कविता
वृक्ष मगन सब देख घिरे घन
नाचें अंबर और गुड़िया
निकले घर से चुन्नू मुन्नू
जादू की लेने पुड़िया
दादी रोकें मम्मी टोके
बारिश में तुम न जाना
ठंडी लग...
स्वतंत्रता दिवस पर दिल से
बात जब जश्न ए आजादी की चली है तो चलो हम भी कह दें..
तिरंगा शान है मेरी तिरंगा जान है मेरी
इसके रहते मुझे...
मोनालिसा
मोनालिसा
तुम अपने घर के सोफे में
ठीक यूँ टंकी थी
जैसे तुम्हारे पीछे टँकी
मोनालिसा की तस्वीर
जो मुस्कुराकर झांक रही थी
सामने रखी मेज में
सचमुच गजब ढा रही...
अना की खातिर ना कीचड़ उछालिये /ग़ज़ल
जुदा हर जिन्दगी का फलसफा है दोस्त
गैर की किस्मत का न सिक्का उछालिये
इसी मकतल में उसने सदियाँ गुजार...















