बच्चे तालियाँ बजाते हैं…
बच्चे खिलखिलाते हैं
हँसते हैं तकते हैं
अबूझ किस्सों कों
परियों की कहानियाँ
उन्हें आज भी लुभाती हैं
पहाड़ पर चढ़ती विशाल मकड़ी
रेत...
अवकाश
नवसृजन को चाहिये अवकाश
प्रत्येक दिन घूमना एक ही धुरी पर
करता है बोझिल ज़िन्दगी को
जरूरी तो नहीं हाथी के कान
लेकर खड़े रहें जमीन पर
तितलियों के...
सच
क्या आप भी
सरेआम सच
कहना चाहते हैं
ये शहर सच को
नकारता है जनाब
.............. .
जब भी सच कहा
लोग खिलखिला के हँसे
आज के दौर में
सच चुटकुले सा है
.........
Guest.. Maina
क्या आपने सुना हुज़ूर
मैना ने सर मुंडवाया है
वो एक सैनिक की बेवा है
संग सैनिक का साया है
पीछे उसके अतिथिगण
की भरी पुरी एक सेना है
जल्दी...
मन ये चाहे तू बच्चा हो जा
मन ये चाहे तू बच्चा हो जा
खफ़ा सच से मगर सारा जहाँ रहता है
मुँह पर तेरा पीठ फिरते ही फिरा
जहाँ ये दोगला सच को...
लाल दीवारें..
लाल दीवारें /भीगी नहीं हैरान थी
दीवारों से निकल
देखने आईं कुछ आँखें
हो विकल बारम्बार
कदम रह गये ठिठक कर उस द्वार
जिसके पीछे बहुत सी...
बातें हैं..
बात जब मैं की चली है तो चलो मैं भी कह दूँ
तुम अपनी मैं में रहो मैं खुदी में खुृश हूँ
तुमसे बेहतर न सही...
बजट के बहाने
कभी हम हँसे कभी वो हँसे
है ज़िन्दगी का बजट यही
फिर क्या गिला कितना मिला
कभी वो सही कभी हम सही
पाक की नापाक हरकत
सैंसर के पहले की फिल्म कैसे पहुँची पाकिस्तान ??
जयचंद मेरे मुल्क के मुगालते में हैं
पैरों तले ज़मीन शायद सीधी सपाट है
बेगैरत हैं...
लक्ष्य
लक्ष्य चाहे कितना बड़ा हो
शुरुआत जमीन से करनी पड़ती है...प्रीति
















