पीपल देव के शनि

चलो चलें एक नए सफर पर कहते नई कहानी एक ना दादी ना नानी जिसमें ना कोई रात की रानी देख ढलता सूरज चढ़ती रातें हर दिन ढले जवानी...

जन्म दिवस पर खाना

जन्मदिन है उनका कहो क्या पकायें ख़्याली पुलावों की प्लेटें सजाये दिवस तीसवाँ आखिर का महीना बातों के हम कितने लच्छे बनाये लगा ली हैं सीढ़ी सुधाकर तक...

माना के साल अभी नया नया सा है

माना कि साल अभी नया नया सा है ये और बात कि चहूँओर बस धुँआ सा है मेरा दर मेरी खिड़की बंद है बेज़ा नहीं बाहर सर्द...