थारे छोरे जितनी पढ़ री(हरियाणवी गीत)

थारे छोरे जितनी पढ़ री सूँ मत ना कहो सिर पे चढ़ री सूँ मैं घूँघट ऊँगट ना काढ़ू मनै सूट सिमा दो माता जी मैं नथनी वथनी...

वक्त

वक्त बदलता है इंसान बदलते हैं कदम-कदम पर यहां भगवान बदलते हैं  वफा कल भी थी आज भी है लोगों वफा की पैकेजिंग के सामान  बदलते...

aansu

याद आए जब मेरी किसी के आंसू पोंछ देना मैं जहां के दर्द में अश्कों में बसा करता हूं

लघुकथा

  लघुकथा नया सवेरा निधि उम्र के उस पड़ाव पर थीं , जहाँ पहुँच कर व्यक्ति दिशा शून्य हो जाता है। पैंसठ  की उम्र और तमाम बीमारियां...

ऐ हिंन्दोस्तान

     आंधियों से तुझको लड़ना सिखा दूं तो चलूँ ऐ सेहरा तुझको गुलशन बना दूं तो चलूँ मुझको तो जाना ही है ऐ हिंन्दोस्तान एक...

दो कांधे और चाहियें

कुछ वक्त और ठहर जा ऐ ज़िन्दगी दो कांधे और चाहिये बेटियाँ कुंवारी हैं अभी

देशभक्ति गीत

मैं वतन का हूं सिपाही यह वतन हमदम मेरा इसके सजदे करते करते बीते यह जीवन मेरा है मैं वतन कहूं सिपाही यह वतन हमदम...

आज के लाल

  निकलते ही पाँव छीन लेते हैं कुर्सी पिता की चिंतन की काठी में बांध छोड़ देते हैं निर्जन वेदना की चिता तक आज के लाल प्रीति राघव चौहान

कविताएँ

कविताएं अच्छी हैं परन्तु कविताएं कागज़ के सिवा कुछ भी नहीं यदि उनमें दिशाबोध न हो और विभीत्स कविताएं तो कविताओं पर भी दाग हैं जो किसी सर्फ एक्सेल, ब्लीच...

चाँद

उसे चांद से कम कुछ नहीं चाहिए उसे क्या मालूम चांद पर चट्टानों के सिवा कुछ भी नहीं उसे क्या मालूम चांद पर परिया नहीं है नहीं मिलेगी वहां...