आज का विचार

जब राह न सूझे तो विश्राम कर... 

माँ

तुम ही कुमारी तुम ही किशोरी तुम ही युवती तुम ही हो यति तुम ही दुर्गा तुम ही शक्ति तुम ही ब्रह्म हो तुम...

Aaj ka vichar

जहालत इक सिफर है  निकलना है इससे  चलो मिलकर इन   स्याह तीलों को मिटाएँ 

मंदिर मंदिर पंडे बैठे

मंदिर मंदिर बैठे पंडे मंदिर बाहर बैठे वृद्ध राम ढूंढते वन वन भटके घर के ऊपर फिरते गिद्ध  खुशहाली को खुशी खा गई  सड़कों पर है बदहाली  दिल्ली से है...

मुंडकल्ली /without scarf on head

मुंडकल्ली दरवाज़ो के पीछे हँसती खिलखिलातीं हैं दहलीज़ के भीतर देखतीं हैं सपने अंतरिक्ष के घर से विद्यालय के रास्ते के सिवा नहीं देखा...

आज का विचार

वो सृष्टि है वो वृष्टि है नित नूतन वो दृष्टि है सिंदूरी रंग टिकुली में ले वो सम्पूर्ण समष्टि है प्रीति राघव चौहान चित्रांकन :आरुषि चौहान

नृत्य /Dance

उसके कदम थिरकते हैं माँ वृंदावन को जाती है जैसे कबूतर मूंद कर आँखें कर रहा हो इंतजार अनहोनी टल जाने की बंद उन...

गूंगी सड़क

टूटी हुई सड़कों पर मुस्कुराते कर चलते हुए लोग स्वच्छता अभियान की धज्जियाँ उड़ाते हुए सड़कों पर कूड़े के ढेर ढेरों पर भिनभिनाती मक्खियाँ चितकबरी गायों के झुंड रेड लाइट जंप...

बोलो रानी/जीजिविषा

जीजिविषा रोज रचती है आड़ी तिरछी लकीरों से काले नीले लाल पीले सतरंगी सुनहरे पल… रास्तों की कालिख धोने को हाथ हैं मशीन भी...

मत रोको अब बह जाने दो

मत रोको अब बह जाने दो एक समन्दर मन के अन्दर कतरा कतरा कह जाने दो मत रोको अब बह जाने दो मन की...