गमले में कानन
मेरे समक्ष है गगन खुला
मेरे समक्ष है गगन खुला
मैं गमले में कर रही हूँ कोशिश
खुलने की गगन सम
घर को वन बनाने की जिद...
आज का विचार
ज़िद थी नाप लेगें
ये तेरी धरती तमाम
त्रिशंकु* बन देखते हैं
अजब क़ौस-ए-कुज़ह*
त्रिशंकु - एक राजा जो स्वर्ग प्राप्ति की इच्छा के चलते...
पिता
पिता एक छत की तरह होता है जैसे सुनते आए हैं देखा भी है। पिता के पास अपार संभावनाओं का थैला होता है जो...
क्या आपको भी नहीं आती नींद…
क्या आपको भी नहीं आती नींद?
आज के लॉकडाउन पीरियड में लगभग तमाम महानगरों में ज़िन्दगी जैसे थम सी गई है। लोगों के पास अपने...
आओ बच्चों कुछ अनोखा कर दिखाएं
आओ बच्चों कुछ अनोखा कर दिखाएं
चलो मिल जुल कर धरती दिवस मनाएं
बो दें एक बीज
हरितिमा का आंगन में
आने वाले कल को
चलो अभी बचाएं
आओ...
बूहे खोल ना माड़ी
बूहे खोल ना माड़ी
धूल राहों की काबिज है
जहाँ की धूलि में खेला
उसी में मिलने आया हूँ
परिंदा था मैं आवारा
परवाज़े न...
कंदील
हवा में कंदीले बहुतेरी बेशुमार थीं
मन्नतें सभी की अपार अपरंपार थीं
हमनें भी इक दिल्लगी में उड़ा दी
सुबह मेरी छत पर बुझी हुईं...
विशेषण (अभ्यास कार्य पत्रक)
सक्षम हेतु अभ्यास कार्य पत्रक
जिला मेवात विशेषण
...
चल मेरे तुम्बे तुम्बक तू
चल मेरे तुम्बे तुम्बक तू
बहुत दिन पहले की बात है। एक पहाड़ की तलहटी...
कुलच्छनी(लघुकथा)
कुलच्छनी
वो पिछले पच्चीस वर्षों से उसे घर लौटने को कहते हुए थक चुकी थी ।अजब यायावरी ठानी थी उसने जिंदगी में एक...














