Yearly Archives: 2025
आग
वो आग जो तसले में पली
आग जिसने जोड़ा सभी को
वो आग जिसने तोड़ा सभी को
वो आग जो शाम को...
जमाने के चलन देखे
जमाने के चलन देखे PritiRaghav Chauhan जमाने के चलन देखे नई कविता
जमाने के चलन देखे
जमाने के चलन देखे
PRITI RAGHAV CHAUHAN
जमाने के चलन देखे
खिले साहब...
धरती
धरती धरती
कल मैं जमीन पर बैठी थी
माँ बोली! धरती पर क्यों बैठी हो?
अभी वसुधा पर ओस है।pritiraghavchauhan.com
मही अभी नम है।
उर्वी से उठो, क्षिति!
धरित्री को...
पानी
पानी.. पानी
पानी
हुई पुरानी ताल-तलैया,
हुए पुराने कुएं जी।
नल ही नल हैं अब तो घर-घर
कहाँ रहे वो झरने जी।
पानी ले जाती पनिहारिन
हवा न जाने कहाँ हुई
बोतल...
नया साल
नया साल Priti Raghav Chauhan
ये जो नया साल है
अब नया सा नहीं लग रहा
दशक दर दशक ये
पाश्चात्यता के रंग में रंग रहा है
ये सर्द...













