Saturday, October 23, 2021
Tags Priti Raghav Chauhan /नई कविता

Tag: Priti Raghav Chauhan /नई कविता

बड़ा आदमी

कुछ रंगीन कंचे, लेमनचूस की गोलियां और चंद टॉफियां जेब में लिए फिरता...

गमले में कानन

मेरे समक्ष है गगन खुला मेरे समक्ष है गगन खुला मैं गमले में कर रही हूँ कोशिश खुलने की गगन सम घर को वन बनाने की जिद...

मनाली…

पुकारता है व्यास का  वो किनारा बार बार आँखों में तैरते हैं वो उनींदे देवदार खर्शू पर काई सा छोड़ कर आया हूँ मन...
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