उसका जाना

कंचन सुबह से ही अपने महानगर वाले घर में तैयारियों में जुटी थी। बैठक कक्ष में उसने आसन, दरी और फूल सजा दिए थे।...

पारिजात

अपराजिता जब पहली बार जब उस छ:फुटे पारिजात से मिली तो उसे लगा मानो वह किसी पुराने परिचित को देख रही हो। उसकी उपस्थिति...

कैसे बताऊँ मैं ही तो सरकार हूँ..

क्य बताऊँ किसलिए बेजार हूँ क्या बताऊँ किसलिए बेजार हूँ रोज के हालात से लाचार हूँ तरबतर हैं चप्पलें बरखा बगैर दुर्गंध से भरा हुआ बाजार हूँ मकानों में...

कसक #नईकविता #प्रीतिराघवचौहान

कुछ, न पाने की कसक सब कुछ होने से ज्यादा है। चाँद समूचा खिड़की में  पर अंधकार से वादा है  मंज़िल पर आ बैठे हैं  प्यास मगर है राह...

TheTeacher

 यदि समाज में जड़ता है, ये जड़ता कौन मिटाएगा? किसकी ज़िम्मेदारी है ये, राहें कौन दिखाएगा? हर चॉक की रेख से पूछो, किसने दुनिया बदली है? हर पुस्तक के पृष्ठ...

योग दिवस

योग एक दिवस नहीं सतत् की जाने वाली क्रिया है, जिसमें स्वयं को लगातार रखना होता है एकाग्र और स्थिर। श्वास की गति में लानी होती है समता चिंतन...

टिटहरी की चीख

टिटहरी की चीख" कहानी : टिटहरी की चीख जोहड़ के किनारे शाम उतर रही थी। सुनहरा सूरज पानी में अपना चेहरा निहार रहा था। वहीं, एक...

श्वेतलाना

एक जंगल था। सावन - भादों में तो बहुत ही घना और हरा-भरा हो जाता था। उस जंगल में बहुत सारे मलबरी यानी शहतूत...

कागज़ की नाव

कागज की नाव..  रात भर बादलों ने जमकर किया नृत्य  हर छत-हर पात पर कुछ इस तरह कि सूरज खुलकर मुस्काना भूल गया बस धीरे-धीरे भीगी हर चीज़... हर कोना... हर...

मशरूम जो बदल देगी जीवन

आयस्टर मशरूम की खेती एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसे छोटे निवेश के साथ भी शुरू किया जा सकता है। यह मशरूम अपनी पौष्टिकता, स्वाद...

आग

  वो आग जो तसले में पली  आग जिसने जोड़ा सभी को वो आग जिसने तोड़ा सभी को वो आग जो शाम को...

जमाने के चलन देखे 

जमाने के चलन देखे PritiRaghav Chauhan जमाने के चलन देखे नई कविता जमाने के चलन देखे     जमाने के चलन देखे   PRITI RAGHAV CHAUHAN   जमाने के चलन देखे खिले साहब...

धरती 

धरती धरती कल मैं जमीन पर बैठी थी माँ बोली! धरती पर क्यों बैठी हो? अभी वसुधा पर ओस है।pritiraghavchauhan.com मही अभी नम है। उर्वी से उठो, क्षिति! धरित्री को...

पानी

पानी.. पानी पानी   हुई पुरानी ताल-तलैया, हुए पुराने कुएं जी। नल ही नल हैं अब तो घर-घर कहाँ रहे वो झरने जी।   पानी ले जाती पनिहारिन हवा न जाने कहाँ हुई बोतल...

नया साल 

नया साल Priti Raghav Chauhan  ये जो नया साल है अब नया सा नहीं लग रहा दशक दर दशक ये पाश्चात्यता के रंग में रंग रहा है ये सर्द...

काशी में शिक्षा

नव भारत ने पकड़ ली अब विकास की राह, वाराणसी में दिखा शिक्षा का नया प्रवाह।   देखे हमने विद्यालयों में नवजागरण स्वर, निपुण भारत का सपना हर बच्चा हो आत्मनिर्भर   कार्यकलापों से...

काशी के बुनकर

हंथकरघा जहाँ गाता धुनों का राग, हर ताना-बाना कहता है दिल की बात।   सूरज सी रेशम किरणों से बुनकर के वो खेल,  मेहनत और कारीगरी का अविरत...