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	<title>Utprerak Lekh &#8211; Priti Raghav Chauhan</title>
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	<description>Priti Raghav Chauhan</description>
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		<title>मशरूम जो बदल देगी जीवन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jan 2025 05:12:52 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[#आयस्टरप्रीतिराघवचौहान]]></category>
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					<description><![CDATA[आयस्टर मशरूम की खेती एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसे छोटे निवेश के साथ भी शुरू किया जा सकता है। यह मशरूम अपनी पौष्टिकता, स्वाद और बाजार में मांग के कारण लोकप्रिय है। इसे घर पर, छोटे स्तर पर या बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से उगाया जा सकता है। 1. आयस्टर मशरूम क्या है? आयस्टर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: left;"><a href="http://pritiraghavchauhan"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2715" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2025/01/file-Vk77QBoqRtxAG7bXPmUaUB-300x300.jpg" alt="" width="300" height="300" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2025/01/file-Vk77QBoqRtxAG7bXPmUaUB-300x300.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2025/01/file-Vk77QBoqRtxAG7bXPmUaUB-150x150.jpg 150w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2025/01/file-Vk77QBoqRtxAG7bXPmUaUB-419x420.jpg 419w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2025/01/file-Vk77QBoqRtxAG7bXPmUaUB.jpg 491w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />आयस्टर मशरूम की खेती एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसे छोटे निवेश के साथ भी शुरू किया जा सकता है। यह मशरूम अपनी पौष्टिकता, स्वाद और बाजार में मांग के कारण लोकप्रिय है। इसे घर पर, छोटे स्तर पर या बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से उगाया जा सकता है।</a></h2>
<h2 style="text-align: left;">1. आयस्टर मशरूम क्या है?</h2>
<h2 style="text-align: left;">आयस्टर मशरूम (प्ल्यूरोटस जीनस) एक सफेद, हल्के भूरे या गहरे रंग का फफूंद है जो विभिन्न प्रकार की जलवायु और सब्सट्रेट्स (माध्यमों) में उगता है। यह प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत है&#8212;</h2>
<h2 style="text-align: left;">2. खेती के लिए सही समय</h2>
<h2 style="text-align: left;">आयस्टर मशरूम उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण जलवायु में उगाया जा सकता है।तापमान: 20-30 डिग्री सेल्सियस।आर्द्रता: 80-90%।</h2>
<h2 style="text-align: left;">समय: यह सालभर उगाई जा सकती है, लेकिन मानसून और सर्दियों का समय सबसे उपयुक्त है।</h2>
<h2 style="text-align: left;">3. स्थान का चयन</h2>
<h2 style="text-align: left;">एक साफ, हवादार और अंधेरे स्थान की आवश्यकता होती है।</h2>
<h2 style="text-align: left;">कमरे का तापमान और आर्द्रता नियंत्रित करने के लिए इसे इनडोर (बंद कमरे) में उगाया जा सकता है।खेती को छोटे स्तर पर घर में या बड़े स्तर पर फार्म हाउस में किया जा सकता है।&#8212;</h2>
<h2 style="text-align: left;">4. खेती के लिए सामग्री</h2>
<h2 style="text-align: left;">1. बीज (स्पॉन): अच्छी गुणवत्ता का आयस्टर मशरूम स्पॉन खरीदें।</h2>
<h2 style="text-align: left;">2. सब्सट्रेट (माध्यम): भूसा (गेहूं, धान, जौ), लकड़ी की छीलन, कॉफी की खल या गन्ने की खोई।</h2>
<h2 style="text-align: left;">3. बैग: प्लास्टिक बैग (पॉलीथीन) जिनमें सब्सट्रेट और बीज भरा जाता है।</h2>
<h2 style="text-align: left;">4. अन्य उपकरण:पानी का स्प्रेयर।थर्मामीटर और हाइग्रोमीटर (तापमान और आर्द्रता मापने के लिए)।</h2>
<h2 style="text-align: left;">5. आयस्टर मशरूम उगाने की प्रक्रिया</h2>
<h2 style="text-align: left;">चरण 1: सब्सट्रेट की तैयारी.. भूसे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें।इसे 65-70 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी में 30-45 मिनट तक उबालें या भिगोएं।पानी निथारकर भूसे को सुखाएं ताकि उसमें नमी 65-70% रहे।</h2>
<h2 style="text-align: left;">चरण 2: बीज लगाना (स्पॉनिंग)प्लास्टिक बैग में सब्सट्रेट और स्पॉन को परतों में भरें।बैग को अच्छी तरह से बांधकर उसमें छोटे-छोटे छेद करें ताकि हवा अंदर जा सके।</h2>
<h2 style="text-align: left;">चरण 3: इनक्यूबेशन (अंकुरण)बैग को 20-25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 10-15 दिनों तक अंधेरे कमरे में रखें।इस दौरान मायसेलियम सब्सट्रेट में फैलता है।</h2>
<h2 style="text-align: left;">चरण 4: फलों का निर्माण (पिनिंग)जैसे ही बैग पर सफेद परत बन जाए, बैग को काट दें।इसे नमी, प्रकाश और हवा वाले स्थान पर रखें।5-7 दिनों में मशरूम के गुच्छे दिखाई देने लगेंगे।</h2>
<h2 style="text-align: left;">चरण 5: कटाई&#8230; 15-20 दिनों में मशरूम तैयार हो जाते हैं।इन्हें जड़ों से काटकर ताजा बाजार में बेच सकते हैं।&#8212;</h2>
<h2 style="text-align: left;">6. रखरखाव और देखभाल कमरे में 80-90% आर्द्रता बनाए रखें।तापमान को स्थिर रखें।हर दिन पानी का हल्का छिड़काव करें।संक्रमित बैग या खराब मशरूम को तुरंत हटा दें।</h2>
<h2 style="text-align: left;">7. लागत और लाभ</h2>
<h2 style="text-align: left;">लागत:छोटे स्तर पर ₹20,000-₹30,000 में शुरू किया जा सकता है।</h2>
<h2 style="text-align: left;">प्रति बैग लागत: ₹30-₹50।</h2>
<h2 style="text-align: left;">एक बैग से 1-2 किलो मशरूम उत्पादन हो सकता है।</h2>
<h2 style="text-align: left;">लाभ:बाज़ार में मशरूम की कीमत ₹150-₹300 प्रति किलो तक हो सकती है।बड़े स्तर पर खेती से सालाना लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं।</h2>
<h2 style="text-align: left;">8. किसके लिए उपयुक्त है?</h2>
<h2 style="text-align: left;">छोटे किसान और बेरोजगार युवक।गृहणियां जो घर से व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं।उद्यमी जो कृषि-आधारित व्यवसाय करना चाहते हैं।</h2>
<h2 style="text-align: left;">9. सरकारी सहायता और प्रशिक्षण भारत सरकार और राज्य सरकारें मशरूम उत्पादन के लिए सब्सिडी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं।कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या राष्ट्रीय मशरूम अनुसंधान केंद्र (सोलन, हिमाचल प्रदेश) से संपर्क करें।</h2>
<h2 style="text-align: left;">10. बाज़ार और विपणन स्थानीय सब्जी मंडी, रेस्टोरेंट, होटल और सुपरमार्केट में आपूर्ति करें।ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर भी बेच सकते हैं।मशरूम के प्रसंस्कृत उत्पाद (जैसे सूखे मशरूम) बनाकर अधिक लाभ कमाएं।</h2>
<h2 style="text-align: left;">आयस्टर मशरूम की खेती आसान, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल व्यवसाय है। उचित प्रशिक्षण और देखभाल के साथ यह आपके लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन सकता है।</h2>
<h2 style="text-align: left;"></h2>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>सीमा त्रिखा का वादा शिक्षा का सूरज चमकेगा ज्यादा</title>
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		<pubDate>Sun, 11 Aug 2024 12:20:33 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[सक्षम हरियाणा]]></category>
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					<description><![CDATA[निपुण भारत के अन्तर्गत चल रहा मूलभूत साक्षरता व संख्या ज्ञान मिशन ने अब सही मायने में प्रगति पथ पर रफ्तार पकड़ रहा है। बच्चे दक्ष हो रहे हैं वह भी खेल खेल में..ये एक क्रांतिकारी परिवर्तन है! एक दो रोज में इसका प्रभाव दिखाई नहीं देने वाला। दूर से देखने पर शिक्षक व प्राथमिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3>निपुण भारत के अन्तर्गत चल रहा मूलभूत साक्षरता व संख्या ज्ञान मिशन ने अब सही मायने में प्रगति पथ पर रफ्तार पकड़ रहा है। बच्चे दक्ष हो रहे हैं वह भी खेल खेल में..ये एक क्रांतिकारी परिवर्तन है! एक दो रोज में इसका प्रभाव दिखाई नहीं देने वाला। दूर से देखने पर शिक्षक व प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे खेलते, समूहों में बातें करते, स्मार्ट टीवी, फोन पर पहेलियाँ हल करते, कॉपियों को रंगते, स्कूल को बालिश्तों में नापते, सड़कों से रैपर<a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7/23_20240805_091724_0022/" rel="attachment wp-att-2612"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2612" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/23_20240805_091724_0022-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/23_20240805_091724_0022-300x169.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/23_20240805_091724_0022.jpg 384w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a> उठाकर पढ़ते, पेड़ों के चारों ओर किलकारियाँ करते, मिट्टी के लौंदो से खिलौने बनाते, रामलीला करते, कामिक्स पढ़ते! नाटक करते, गीत गाते नजर आएंगे। लगेगा, ये क्या? बच्चे फ़ालतू कामों में उलझे हैं और गुरु जी देखकर मुस्कुरा रहें हैं। देखने सुनने में अजीब लगेगा लेकिन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिये भारत सरकार की यह नई शिक्षा नीति के तहत आई यह योजना मेरे देश के बच्चों को शुरुआत से ही एक जिम्मेदार व निपुण नागरिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।</h3>
<h3>      इसकी एक झलक नूँह जिले की स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों से मिलने आईं शिक्षा मंत्री श्रीमती सीमा त्रिखा जी के आगमन पर देखने को मिली। आसमान में घनघोर घटाएँ छाईं थीं। रात भर हुई बारिश ने पूर्व नियोजित निपुण स्टॉल को आडिटोरियम की गैलरी में सिमटने को मजबूर होना पड़ा। बच्चों व उनके शिक्षकों ने जाने कितनी तैयारियाँ की थीं। किंतु सभी प्रोजेक्ट सिमटे सिकुड़े से एक के ऊपर एक जमा हो गए। रात भर आला अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ती रहीं।</h3>
<p>&nbsp;</p>
<h3>     मंत्री जी के आगमन से ठीक पहले आधा घंटे पहले तेज चमक के साथ सूरज जी पधारे।तभी मंत्री महोदया का शुभागमन हुआ। डीईओ श्रीमान परमजीत चहल सभी अधिकारियों के संग एन सी सी कैडेट्स व गाईडस ने उनका जोरदार स्वागत किया। बारह भाषाओं में माननीया का सादर अभिवादन किया गया।</h3>
<h3>        इसके बाद एक एक कर वह प्रत्येक निपुण स्टॉल पर गईं। वाह! के भाव उनके चेहरे से सहज ही पढ़े जा सकते थे। एक से बढ़कर एक टी एल एम लिए गुरुजन मंत्री जी से रूबरू होकर भावविभोर हो रहे थे।</h3>
<h3>इसके बाद देसी खाने के जायके का मजा ले वो नूँह के नल्हड़ मैडिकल कॉलेज के उस विशाल आडिटोरियम की ओर बढ़ गईं जो ऊपर से नीचे तक खचाखच भरा था।</h3>
<h3>मेवात के प्रत्येक गाँव के विद्यालय की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष व विद्यालय मुखिया व प्रधानाचार्य यहाँ मौजूद थे। कुछ चुनिंदा बच्चे भी आए थे।</h3>
<h3>      जोरदार तालियों से आडिटोरियम गूँज उठा।महोदया के सोफे के आगे एक महा निपुण रंगोली बनी थी। रंग बिरंगे रंगों वाली किताबों के बीच निपुण लोगो.. और उसके दोनों ओर पैंसिलें.. रंगोली के सामने बच्चों द्वारा बनाए रंग बिरंगे फूल गमलों में लगे थे। महोदया भी अचरज में रही होंगी इतने बड़े फूल आए कहाँ से। उन्हें क्या मालूम कि ये एक सरकारी स्कूल की कक्षा तीसरी के बच्चों द्वारा बनाए गए हैं। उस बड़े आडिटोरियम के पर्दो और दीवारों पर तरह तरह के चित्र जो बच्चों और शिक्षकों की संयुक्त मेहनत का परिणाम थे नजर आ रहे थे। नूँह के स्वागत का</h3>
<h3> अंदाज़े बयां निराला है</h3>
<h3><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7/20240809_101309/" rel="attachment wp-att-2610"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2610" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240809_101309-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240809_101309-300x169.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240809_101309-768x432.jpg 768w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240809_101309-696x391.jpg 696w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240809_101309-747x420.jpg 747w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240809_101309.jpg 806w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a>सच तो ये है यहाँ का</h3>
<h3>हर शिक्षक आला है</h3>
<h3>महोदया को एक पौधे व फूलों से नवाज़ा गया। तत्पश्चात स्काउट्स स्कार्फ़ व शॉल पहनाकर सम्मानित किया गया। उनके साथ आए सभी मननीय हस्तियों को भी पौधे, फूल, स्काउट्स स्कार्फ़ व शाल पहनाकर सम्मानित किया गया।</h3>
<h3>स्वागत वंदन,अभिनंदन के बाद योग की शानदार प्रस्तुति हुई। उसके बाद सीमा त्रिखा जी माईक संभाला।</h3>
<p>&nbsp;</p>
<h3>उन्होंने कहा— प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को संस्कारमय व अच्छी शिक्षा प्रदान की जा रही है।शिक्षा से ही बदलेगी नूँह की तस्वीर और होगा इसका सर्वांगीण विकास।</h3>
<h3>  स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधानों को न सिर्फ़ उन्होंने स्टेज पर बुलाकर सम्मानित किया वरन् उनकी समस्याओं को सुनकर उनके निराकरण का भी आश्वासन दिया। जब उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने अभी हाल ही में साढ़े सात हजार अध्यापकों को नियुक्तियां देकर बड़ा कार्य किया है। जिसमें नूंह जिला कैडर को भी 640 टीजीटी अध्यापक मिले हैं। अभी जून में ही नूंह को 300 पीजीटी तथा इससे पहले एचकेआरएन के तहत 600 टीचर व 500 शिक्षा सहायक स्कूलों में नियुक्त किए गए हैं.. तो हॉल तालियों से गूँज उठा। सरकार निरंतर यहां पर अध्यापकों की कमी को दूर कर रही है, ताकि नूंह जिला के बच्चों को सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिल सके।उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 130 स्कूल भवनों का जल्द ही निर्माण किया जाएगा।</h3>
<figure id="attachment_2613" aria-describedby="caption-attachment-2613" style="width: 169px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7/20240801_220913/" rel="attachment wp-att-2613"><img loading="lazy" class="size-medium wp-image-2613" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-169x300.jpg" alt="By Class Third GPS REWASAN " width="169" height="300" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-169x300.jpg 169w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-576x1024.jpg 576w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-768x1365.jpg 768w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-864x1536.jpg 864w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-1152x2048.jpg 1152w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-696x1237.jpg 696w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-1068x1899.jpg 1068w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-236x420.jpg 236w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/08/20240801_220913-scaled.jpg 1440w" sizes="(max-width: 169px) 100vw, 169px" /></a><figcaption id="caption-attachment-2613" class="wp-caption-text">Flowers by pencils waste..</figcaption></figure>
<h3>     सबसे पहले जिले के टॉपर बच्चों को फिर फिर स्टार टीचर्स को व भारत स्काउट एंड गाईड नूँह शाखा की राज्यपाल से पुरस्कृत गाईडस का सम्मान किया गया।</h3>
<h3>         स्वम  यही समय है वृक्षारोपण का। सभी एक पेड़ मां के नाम के साथ-साथ बच्चों के नाम का भी लगाएं।</h3>
<h3>       शिक्षा से जीवन सुगम व सुखमय बनता है अतः आज ही अपने बच्चों को विद्यालय में दाखिल कराएँ व जो पढ़ रहें हैं उनकी पूरी जानकारी रखें व उनके स्तर को आगे बढ़ाएँ।</h3>
<h3>सीमा त्रिखा का है वादा</h3>
<h3>शिक्षा का सूरज चमकेगा ज्यादा</h3>
<p>&nbsp;</p>
<h3></h3>
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		<title>क्या हरिद्वार जाना है ? जानें क्या नहीं करना?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jul 2024 18:39:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Samajik Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[#pritraghavchauhan. com]]></category>
		<category><![CDATA[https://pritiraghavchauhan.com/]]></category>
		<category><![CDATA[pritiraghavchauhan.com/अनंतयात्रा]]></category>
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					<description><![CDATA[हरि के चरण जहाँ हों वहाँ उस पवन पावन धाम पर कौन नहीं जाना चाहेगा भला!विष्णु के इस द्वार पर अपने जीवन में कम से कम दो बार सभी जाते हैं या जाने की इच्छा रखते हैं। कहते हैं घर में ब्याह शादी के उपरांत गंगा नहाने जाना शगुन होता है तो वहीं मृत्योपरांत मृतक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<h3><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8/20240629_142429/" rel="attachment wp-att-2605"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2605" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2024/07/20240629_142429.heic" alt="" width="1" height="1" /></a>हरि के चरण जहाँ हों वहाँ उस पवन पावन धाम पर कौन नहीं जाना चाहेगा भला!विष्णु के इस द्वार पर अपने जीवन में कम से कम दो बार सभी जाते हैं या जाने की इच्छा रखते हैं। कहते हैं घर में ब्याह शादी के उपरांत गंगा नहाने जाना शगुन होता है तो वहीं मृत्योपरांत मृतक की मोक्ष हेतु गंगा में अस्थि-विसर्जन आवश्यक संस्कार है।</h3>
</blockquote>
<h3>         कभी नहीं गए तो जाकर देखें.. गंगा बार बार बुलाती है!समय के साथ भारतीय संस्कृति में भी जोश आया है। आज भारतीय न सिर्फ अच्छे- बुरे समय में वरन् बार बार इस भागीरथी की ओर आते हैं। ये सचमुच विकसित भारतवर्ष का प्रतीक है। सड़क और रेल मार्ग इतने सरल और सहज हुए हैं कि पूरब &#8211; पश्चिम, उत्तर- दक्षिण प्रत्येक दिशा से लोग खिंचे चले आते हैं। जहाँ पहले घाट कम थे वहाँ आज पूरे हरिद्वार में घाट हैं। आप कहीं भी संगीत की इस सरिता में गोते लगा सकते हैं।</h3>
<h3>      आप भी जा रहें हैं हरि के द्वार पर तो सदा याद रखें एक बात आस्था न हो न जाएँ क्योंकि ये त्रिपथगंगा आपसे कभी कुछ नहीं मांगती, सदैव देवनदी सी कलकल बहती और आपके समस्त संतापों को स्वयं में तिरोहित करती है।</h3>
<h3>1 आस्था नहीं तो कभी और सही—</h3>
<h3></h3>
<h3>यदि आप की आस्था नहीं है विष्णु पदी के पावन सानिध्य में पग पखारने की तो कदापि न जाएँ इस देवनदी के दर्शन हेतु। 2.ऑनलाइन बुकिंग न करें —</h3>
<h3></h3>
<h3>     गंगाजी जाने पर ऑनलाइन कुछ भी बुक न करें। अपनी आँखों से देखें और तय करें आप कहाँ ठहरना चाहेंगे.. ऑनलाइन धोखा हो सकता है। यहाँ आकर आप पाएंगे कि आप ऑनलाइन ठगे गए। यहाँ धर्मशालाएँ आपके तीन और चार सितारा होटलों से से कहीं बेहतर हैं। लेकिन अभिजात वर्ग के मन में बैठा है कि अधिक पैसे देकर हम ज्यादा सुविधाएं पाएंगे!सच तो ये है कि कभी भी आएँ अपने अनुकूल कोई स्थान देखें और रुकें, ऐसा करते हुए आप ऑनलाइन देख सकते हैं कि ठगे तो नहीं गए। ऑनलाइन सुंदर फोटो देखकर दिग्भ्रमित न हों।</h3>
<h3>3.सवारी और साधन—</h3>
<h3>      ई-रिक्शा का किराया बीस रुपये है,उससे अधिक न दें यदि आप ऐसा करते हैं तो आप उस ई-रिक्शा वाले को नियमविरुद्ध जाने के लिए उकसाते हो जो देश में अराजकता व भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। कम दूरी पर यथा एक दो किलोमीटर जाने के लिए दस रुपये भी दे सकते हैं।</h3>
<h3>4.सवारी अपने सामान की स्वयं जिम्मेदार है—घाट पर अपना सामान किसी दूसरे के भरोसे न रखें। आप आस्तिक हैं। आप सरल ह्रदय हैं इसका ये अर्थ कदापि नहीं इस धरती पर रहने वाला हर प्राणी सह्रदय व सत्चरित्र है।वो चोरी चकारी करने वाला भी हो सकता है या कोई कामचोर भी.. कमकस व हरामखोर इंसान ऐसी जगह पर ज्यादा मिलते हैंअतः सदैव विवेक से कार्य लें।</h3>
<ul>
<li>
<h3>5. भीख को बढ़ावा न दें—गंगा जी आएँ हैं तो कृपया भीख की परिपाटी को आगे न बढ़ाएँ। देखकर हैरत हुई एक लम्बे चौड़े क्षैत्र में कुछ न करने वालों की कतार थी। आपकी आस्था इनका कमकशी का साधन न बने याद रखें! अभी कुछ समय पहले डलहौजी जाना हुआ तो वहाँ के हालात के बारे में किसी से पूछने पर ज्ञात हुआ कि वहाँ कोई भिखारी नहीं है। वो भी भारत का हिस्सा है.. श्रध्दा है तो विद्यालय बनाओ, हस्पताल बनाओ, पेड़ लगाओ, प्याऊ बनाओ, किताब दो, कॉपी दो, आजीविका के साधन दो.. भीख मत दो।</h3>
</li>
</ul>
<blockquote>
<h3></h3>
</blockquote>
]]></content:encoded>
					
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		<title>हिन्दी में अल्पज्ञ ए आई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Aug 2023 03:55:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[pritiraghavchauhan. com]]></category>
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					<description><![CDATA[हिन्दी में अल्पज्ञ ए आई AI आज के दौर का आधुनिक मानव निर्मित इंसान.. हर क्षेत्र में तेजी से अपने पैर पसार रही है। लेकिन हिन्दी में इसका हाथ तंग है। जो भारत जैसे देश के लिए कायदे की और फायदे की बात है। यह हिन्दी में अल्पज्ञ तो इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दी में अल्पज्ञ ए आई</p>
<p>AI आज के दौर का आधुनिक मानव निर्मित इंसान.. हर क्षेत्र में तेजी से अपने पैर पसार रही है। लेकिन हिन्दी में इसका हाथ तंग है। जो भारत जैसे देश के लिए कायदे की और फायदे की बात है। यह हिन्दी में अल्पज्ञ तो इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं:</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>1. डेटा की कमी: हिन्दी AI सिस्टम को वैद्यकीय, न्यायिक, शैक्षिक, वनस्पतिज्ञान, ज्ञान, साहित्यिक और विज्ञानात्मक डेटा के बहुत कम संघटन मिलते हैं। इसके कारण AI सिस्टम की अधिक मजबूती और प्रभावशीलता प्रदान करने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है। बहुत सारे भाषण, लेख, साहित्य और ऑडियोग्राम आदि हो सकते हैं, जो केवल अंग्रेजी में उपलब्ध होते हैं, इसलिए डेटा की कमी है और हिन्दी AI के इंजन को सुधारने के लिए आवश्यकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>2. भाषाई संरचना की जटिलता: हिन्दी में वाक्यांशों की अनुक्रमिकता, वाक्य-रचना की जटिलता, और व्याकरणिक उपसज्जता इसे एक जटिलतापूर्ण भाषा बनाती है। इस कारण, इसे समझना और संसाधित करना सामान्य भाषाज्ञानी और नवीन AI सिस्टमों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा, समाज और जटिल व्यावहारिकता के प्रश्नों को मशीन नवीकरण के लिए समझना और आधारभूत भूमिका को निर्धारित करना अभिनव AI सिस्टमों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>3. भाषा समझने की कला: सामान्य हिन्दी के साथ संवाद करना भाषाई कला है और इसके साथ धीमा समन्वयन होता है। सामग्री के संकेत, उपयोग में बदलाव और भाषा का बढ़ता प्रयोग इन एआई सिस्टमों को सुधारने के लिए आवश्यक हो सकता है। विभिन्न सांस्कृतिक और सार्वजनिक भाषण, उपन्यास, कहानियाँ, लेख आदि का संसाधित करना मुश्किल होता है क्योंकि इसे समझ से संबद्धऔर मूल्यांकित करने में संचार का सामरिक विवरण करने की क्षमता कम हो सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>4. भाषा के विस्तार की क्षमता: AI मंडलों और सिस्टमों को बढ़ावा देने के लिए हिन्दी भाषा में सामग्री के विस्तार की क्षमता हो सकती है। एक अभिनव AI सिस्टम को भाषाई संरचना की प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है जिसमें प्रकृति, मनोआदर्श रुचि, और भाषाई प्रयोग के कारक हो सकते हैं। लेकिन हिन्दी में सामग्री के संग्रह की कमता के कारण, यह अद्यतन नहीं किया जा सकता है और फिर से जतिलतापूर्ण हो सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>चूँकि वर्तमान में हिन्दी में एक व्यापक AI सिस्टम की अभाव है, इसलिए हम सकारात्मक दिशा में कार्य कर रहे हैं ताकि हम इसे सुधारें और भाषा के पीछे के प्रशंसात्मक तत्वों को समझें और पहचानें। एक अच्छा स्थान जहां हम सुधार सकते हैं यह है कि हम हिन्दी भाषा में अधिक संग्रह सामग्री बनाएं, समर्थन और प्रायोगिक संकेतों का उपयोग करें, और नवाचार करके यह ज्ञात करें कि कैसे हम एक हिन्दी AI सिस्टम को नवीकरण कर सकते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इतना ही नहीं, यह भी आवश्यक है कि हम सामान्यतः हिन्दी में AI का उत्पादन, उचितता, और एकरूपता की बात करें, ताकि लोग ऐसे सर्ववानिक भाषांतरक (NMT) और प्रतीकात्मक भाषांतर के लिए संवेदनशील हो सकें। इसी तरह, हमें भाषीय गोलमेज का प्रचार करके समान और विचार किए गए भाषा AI के सामानता के लिए स्थान बनाना चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>संवाद करने की योग्यता और वैद्यकीय, आनुवंशिक, औद्योगिक, वाणिज्यिक, प्रबंधनिक, कानूनी और पूर्वानुमानित तरीकों को संबंध बनाने के लिए हिन्दी AI इंजन में मदद मिलेगी। तो हाँ, वर्तमान में हिन्दी में AI का हाथ तंग हो सकता है, लेकिन यह संभव है और चुनौतीपूर्ण कार्यों के बावजूद ये उन्हें सुधारेंगे और उनकी प्रायोगिकता<a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e-%e0%a4%8f-%e0%a4%86%e0%a4%88/20230825_091827_0000/" rel="attachment wp-att-2521"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2521" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/08/20230825_091827_0000-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/08/20230825_091827_0000-300x169.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/08/20230825_091827_0000-768x432.jpg 768w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/08/20230825_091827_0000-696x391.jpg 696w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/08/20230825_091827_0000-747x420.jpg 747w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/08/20230825_091827_0000.jpg 854w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a> बढ़ाएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>दुनिया दुखी फिरे भाई..</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Feb 2023 06:54:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया दुखी फिरे भाई..]]></category>
		<category><![CDATA[निराशा से निकलो..]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;             दुनिया दुखी फिरे भाई…    दु:ख की परिभाषा केवल वो लोग बता सकते हैं जो इस दौर से गुजरे हों। एक छोटे बच्चे के लिए जहाँ कांटे की चुभन एक बड़ी दुखद घटना हो सकती वहीं उम्र बढ़ने के साथ दुख के रंग और रूप भी बदलते चले जाते हैं। कोई हाथ-पैरों से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="font-weight: 400;">           </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">दुनिया दुखी फिरे भाई… </span></p>
<p><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88/attachment/1676009959700/" rel="attachment wp-att-2433"> </a></p>
<p><span style="font-weight: 400;">दु:ख की परिभाषा केवल वो लोग बता सकते हैं जो इस दौर से गुजरे हों। एक छोटे बच्चे के लिए जहाँ कांटे की चुभन एक बड़ी दुखद घटना हो सकती वहीं उम्र बढ़ने के साथ दुख के रंग और रूप भी बदलते चले जाते हैं। कोई हाथ-पैरों से अपंग होकर दुख के अथाह समुद्र में चला जाता है तो कोई बड़ी से बड़ी बीमारी होने पर भी हँसकर हिमालय चढ़ जाता है! </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">       गहरे अवसाद की भावना जो व्यक्ति की समझ को हर ले, दुख है। किसी विषय से चित्त में जो खेद या कष्ट होता है वही दुःख है । दुःख सें द्वेष उत्पन्न होता है। जब किसी विषय से चित्त को दुःख होगा तब उससे द्वेष उत्पन्न होगा ।ऐसी अवस्था जिससे छुटकारा पाने की इच्छा प्राणियों में स्वाभाविक हो दुख कहलाता है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">        दुख तीन प्रकार के होते हैं &#8211; मानसिक, शारीरिक और भौतिक। मानसिक अर्थात जो मन से उत्पन्न स्वेच्छा से प्रबल भावनाओं के वशीभूत हो किए जाते हैं जैसे- ईर्ष्या, धोखा, घमंड, क्रूरता, स्वार्थपरता के चलते मानव एक न एक दिन चिंता, क्रोध, आशंका, अपमान शत्रुता, बिछोह, शोक आदि को प्राप्त करता है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">शारीरिक दुख वे होते हैं जो किसी रोग, चोट, आघात, हलाहल आदि के प्रभाव से हों और जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है भौतिक  दुख वे हैं जो अचानक बिना बुलाए आ जाए। जैसे भूकंप, अकाल, महामारी, अतिवृष्टि आदि। यह सभी दुख हमारे मानसिक शारीरिक और सामाजिक कार्यों के परिणाम स्वरुप ही उत्पन्न होते हैं। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">      सारा खेल मनःस्थिति का है। एक ही प्रकार की दुखद परिस्थिति किसी एक के लिये एक कतरे के समान तो दूसरे व्यक्ति के लिए सागर सदृश हो सकती है। इससे बाहर निकलने का केवल एक ही उपाय है मानसिक कुवृतियों का शीघ्रता से परिमार्जन। प्रिय जनों की मृत्यु, धन की हानि, अपयश, असफलता, गरीबी आदि मानसिक दुख से प्राप्त होते हैं। बुद्ध का मानना ​​था कि अधिकांश दुख चीजों की लालसा या इच्छा की प्रवृत्ति के कारण होते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">     शारीरिक दुखों का कारण है शरीर द्वारा अति में किये गये कार्य.. आहार में कमी या ज्यादती, दोनों बीमारी को बुलावा हैं। जल्दबाजी में दुर्घटनाग्रस्त होना।विष आदि के प्रभाव से मृत्यु सम कष्ट। यदि भौतिक दुखों की बात की जाए तो अधिकांश भौतिक दुख हमारे सामाजिक कुकृत्यों का परिणाम ही तो हैं। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">            एक दुखी प्राणी भावनात्मक रूप से &#8220;बंद&#8221; महसूस कर सकता है।इस अवस्था में क्रोध, अकेलापन या अनिश्चितता शामिल हो सकती है।जैसे-जैसे जीवन में बदलाव महसूस होते हैं, अवसाद शुरू हो सकता है। इस अवस्था का उपयोग एक दुःखी व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो अभिभूत और असहाय महसूस करता है।और अंत में दु:ख की स्वीकृति की अवस्था। यह अंतिम चरण तब होता है जब लोग नुकसान को स्वीकार करने और स्वीकार करने के तरीके ढूंढते हैं।इस पूरे प्रकरण में कभी कुछ दिवस तो कभी-कभी महीने यहाँ तक की वर्ष भी लग सकते हैं। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">लेकिन दुख से बाहर आना ही व्यक्ति का परम कर्तव्य है। एक दुख के वशीभूत हो वह स्वयं को अंधकूप में नहीं डाल सकता। जब मनुष्य दुखी होता है तो वह वैराग्य की ओर अग्रसर होता है। दुख इसीलिए आते हैं कि मानव की आत्मा के ऊपर जमी मलिनता की परत उतर जाए। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मानव को ये कभी नहीं भूलना चाहिए चाहे कि दुनिया में कोई घर ऐसा नहीं जहाँ रहने वाले लोगों का दुखों से कभी न कभी वास्ता न पड़ा हो। लेकिन फिर भी कहकहे हैं, कहकशां तक पहुंचने के</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सपने हैं। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">खाली झंझावातों से </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अंधियारी काली रातों से</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अंबर डोले बेशक डोले</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कब तृण हारा तू बोल जरा</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">    </span></p>
<p><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88/attachment/1676009959700/" rel="attachment wp-att-2433"><img loading="lazy" class="size-medium wp-image-2433 alignleft" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700-300x200.png" alt="" width="300" height="200" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700-300x200.png 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700-1024x683.png 1024w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700-768x512.png 768w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700-1536x1024.png 1536w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700-696x464.png 696w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700-1068x712.png 1068w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700-630x420.png 630w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/02/1676009959700.png 1800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a></p>
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		<title>मिशन मोड में राष्ट्रीय शिक्षा &#8211; भाग 2</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Jul 2022 16:34:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[Samajik Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[सक्षम हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[#निपुण भारत #आत्मनिर्भर भारत #राष्ट्रीय शिक्षा नीति #PritiRaghavChauhan]]></category>
		<category><![CDATA[निपुण भारत मिशन]]></category>
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					<description><![CDATA[निपुण भारत मिशन और मूलभूत साक्षरता  &#160; केंद्र सरकार ने शिक्षा में अमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए शुरु किया एक नया मिशन &#8211; निपुण भारत मिशन!जिससे देश के सभी विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा । इस मिशन का लक्ष्य है कक्षा तीसरी तक के सभी बच्चों मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान से परिचित कराया जाए। केंद्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%bf-2/resize_20220710_213437_7039/" rel="attachment wp-att-2334"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2334" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213437_7039-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213437_7039-225x300.jpg 225w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213437_7039.jpg 300w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" />निपुण भारत मिशन और मूलभूत साक्षरता </a></p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>केंद्र सरकार ने शिक्षा में अमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए शुरु किया एक नया मिशन &#8211; निपुण भारत मिशन!जिससे देश के सभी विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा । इस मिशन का लक्ष्य है कक्षा तीसरी तक के सभी बच्चों मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान से परिचित कराया जाए। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना को अंजाम देने के लिए स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग इस पूरे जोश के साथ जुट गया है। निपुण मिशन की आवश्यकता क्यों पड़ी ? इसका कारण विद्यार्थियों के बुनियादी ज्ञान में कमी होना कह सकते हैं। निपुण का उद्देश्य ही है कि बच्चे के आधार को मजबूत करके उन्हें पढ़ने लिखने व गणित के कौशल हासिल करने मैं सक्षम बनाया जाए। ताकि विश्व में वो एक रोल मॉडल बन सकें।</h3>
<h3>     बचपन को दक्ष बनाने में जुटेगा पूरा तंत्र। राष्ट्रीय स्तर पर इसे विद्यालय और साक्षरता विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है जो बच्चों के सीखने अंतराल को भरना, सीखने व आकलन के लिए नई नई रणनीतियां बनाना मैं उन्हें लागू करना आदि कार्य करते हैं। राज्य स्तर पर इस योजना का संचालन शिक्षा विभाग द्वारा किया जा रहा है। जिसके लिए रिपेयरिंग कमेटी का गठन किया गया है। राज्य के सेक्रेटरी द्वारा इसका कार्यान्वयन किया जाएगा। जिला स्तर पर इस कार्य को उपन्यायधीश व उपायुक्त महोदय द्वारा संचालित किया जा रहा है जिसके अंतर्गत जिला शिक्षा अधिकारी, कमेटी के सदस्य, सी ई ओ, जिला अधिकारी जिला स्वास्थ्य अधिकारी आदि शामिल हैं । खंड स्तर पर इसका कार्यान्वयन मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और खंड संसाधन अधिकारियों द्वारा किया जाता है।और जमीनी स्तर पर इसका कुशल संचालन करेंगे शिक्षक, अभिभावक और समुदाय के सभी सदस्य। मेरे कहने का तात्पर्य है कि शिक्षा के इस महायज्ञ में पूरे देश को आहुति देनी होगी यानी अपना योगदान देना होगा तभी यह मिशन सिरे चढ़ेगा। <a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%bf-2/resize_20220710_213436_6459/" rel="attachment wp-att-2335"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2335" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213436_6459-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213436_6459-300x225.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213436_6459-80x60.jpg 80w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213436_6459-265x198.jpg 265w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213436_6459.jpg 400w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a></h3>
<h3>         भारत में भाषा शिक्षण के लिए त्रिभाषा सूत्र को रखा गया है जिसमें पहली दूसरी और तीसरी भाषाओं का शिक्षण बच्चों को दिया जाना है। बहुभाषावाद भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाता है। ये संज्ञानात्मक अभिवृद्धि भी लाता है। जो बच्चे एक से अधिक भाषाएं जानते हैं वे शैक्षिक रूप से और भी अधिक रचनात्मक और सामाजिक रुप से सहिष्णु होते हैं। मिशन का उद्देश्य है कि देश का प्रत्येक बालक कक्षा तीसरी के अंत 2026-2027 में भाषाई कौशलों में दक्षता प्राप्त करें। जैसे समझ के साथ सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना और तर्क सहित चिंतन करना।<a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%bf-2/resize_20220710_213436_6140/" rel="attachment wp-att-2336"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2336" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213436_6140-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213436_6140-225x300.jpg 225w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/07/Resize_20220710_213436_6140.jpg 300w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" /></a></h3>
<h3>      जब बच्चा विद्यालय में प्रवेश करता है तो वह अपनी मातृभाषा को अपने साथ लाता है। यह उसकी प्रथम भाषा है जिसे वह अपने परिवार अपने परिवेश से सुनता व सीखता आया है। बच्चे को अपने परिवेश की बोली सीखने में ज्यादा कवायद नहीं करनी पड़ती। क्योंकि यह भाषा उसके चारों ओर के परिवेश में पहले से ही है।इसीलिए यह उसकी अभिव्यक्ति का मूल आधार भी होती है। भाषा सीखने के लिए बच्चे अपने ही तरीके इस्तेमाल करते हैं वे देखते हैं सोचते हैं अनुमान लगाते हैं वर्गीकरण करते हैं भाषा सिखाते वक्त हमें यह देखना होगा वे कैसे भाषा को आसानी से सीखते हैं? हम अपने मिशन में तभी कामयाब होंगे जब हम उनकी प्रथम भाषा को अपने भाषा शिक्षण से जुड़े फिर चाहे यह हिंदी हो या या अंग्रेजी संस्कृत जर्मन फ्रांसीसी आदि। निपुण मिशन एक बहुभाषी निपुण बच्चे को तैयार कर रहा है जिससे बच्चा संज्ञानात्मक विकास की तरफ बढ़ेगा और शैक्षिक उपलब्धियों</h3>
<h3>में उत्कृष्टता प्राप्त करेगा एक बहुभाषी बालक अधिक रचनात्मक, अधिक कुशल, अधिक सहिष्णु होता है।</h3>
<p>.. क्रमशः</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>के फॉर कंडाघाट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jun 2022 04:13:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[#आर्चिड होम स्टे]]></category>
		<category><![CDATA[#जगर मगर भारत]]></category>
		<category><![CDATA[#शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[शिमला जाने के लिए जब जगह जगह रहने के स्थान ढूंढे तो एक जगह नजर अटकी.. कंडाघाट पर। कारण यदि जानेगें तो हो सकता है आपको बचकाना लगे। लेकिन यह सच है कि ज्येष्ठ की भरी गर्मी में सबसे सस्ता राहत योग्य स्थान यही लगा। आर्चिड होम स्टे! एक सप्ताह का अवकाश था। सचमुच मेरा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f/resize_20220630_092401_1750/" rel="attachment wp-att-2318"><img loading="lazy" class="aligncenter size-full wp-image-2318" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_092401_1750.jpg" alt="" width="105" height="140" /></a></p></blockquote>
<h2>शिमला जाने के लिए जब जगह जगह रहने के स्थान ढूंढे तो एक जगह नजर अटकी.. कंडाघाट पर। कारण यदि जानेगें तो हो सकता है आपको बचकाना लगे। लेकिन यह सच है कि ज्येष्ठ की भरी गर्मी में सबसे सस्ता राहत योग्य स्थान यही लगा। आर्चिड होम स्टे! एक सप्ताह का अवकाश था।</h2>
<p><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f/resize_20220630_091459_9064/" rel="attachment wp-att-2321"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2321" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091459_9064-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091459_9064-300x169.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091459_9064.jpg 480w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a></p>
<h2>सचमुच मेरा यह फैसला एकदम सही था। अपने पाँच दिवसीय स्टे में अपने हाथ से बनी चाय और यहाँ की आनर वृद्धा आंटी जी के हाथ से बने भोजन ने घर से बाहर होने का भेद मिटा दिया। दरअसल कंडाघाट में कोर्ट द्वार एक ग्रामीण क्षेत्र है। शिमला मार्ग का विकास और विस्तार होने के कारण यहाँ के बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ पहुंचा है। ग्राम वासी अभी यह समझ ही नहीं पा रहे कि उनके पास कुदरत का कौन सा अनमोल खजाना है ।पहाड़ी जीवन और उनके कार्यों को पास से देखना ही जीवन में नवीन ऊर्जा का संचार करता है। सोचा क्या फर्क पड़ता है? तीस किलोमीटर इधर या उधर।</h2>
<p><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f/resize_20220630_092401_1925/" rel="attachment wp-att-2319"><img loading="lazy" class="aligncenter size-full wp-image-2319" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_092401_1925.jpg" alt="" width="105" height="140" /></a></p>
<h2>शहरी मायाजाल तो दिन रैन अपने मैट्रो सिटी में देखते ही हैं। अब ज़िन्दगी से जुड़ा जाए।</h2>
<h2></h2>
<h2>कंडाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग 22 पर स्थित है। हिमाचल की राजधानी शिमला यहाँ से 30 कि.मी. की दूरी पर है। ऐतिहासिक पटियाला राजघराने की शीतकालीन राजधानी तथा वर्तमान में एक प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र चैल जाने के लिए सड़क यहीं से मुड़ती है। चैल यहाँ से 29 कि.मी. की दूरी पर है। आप यदि भारत में नैसर्गिक सौंदर्य और यहाँ की ग्रामीण व्यवस्था से परिचित होना चाहते हैं तो बजाय बड़े शहरों के यहाँ के ग्राम व देहाती क्षेत्रों का भ्रमण करे। असली भारत यहीं बसता है।</h2>
<p><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f/resize_20220630_091127_7673/" rel="attachment wp-att-2322"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2322" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091127_7673-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091127_7673-300x169.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091127_7673.jpg 480w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a></p>
<h2> चलो चलें कंडाघाट। यहाँ आकर आप स्वयं को आनंद के एक अलग मुकाम पर पाएंगे। पहाड़ सदैव शांति का पर्याय होते हैं। यहाँ आप अपने दिल से निकलने वाली आवाज को सुन सकते हो। सुबह सवेरे पक्षियों का अद्भुत कलरव, शाम तक घाटी में फैलते अलग अलग रंग और यहाँ के सदैव कर्मरत ग्रामीण। यदि मैं कहूँ कि पहाड़ का अर्थ है सतत गति.. तो गलत न होगा। कंडाघाट में कुछ रोज ठहरने के उपरांत पाया कि बड़े बड़े हिमाचली स्थल ही क्यों? पूरा हिमालय अपने आप में अनूठा है। इसकी हर इकाई से रूबरू होगें तभी तो जानेंगे क्या है यह?</h2>
<ul>
<li><a href="https://pritiraghavchauhan.com/%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f/resize_20220630_091125_5912/" rel="attachment wp-att-2323"><img loading="lazy" class="aligncenter size-medium wp-image-2323" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091125_5912-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091125_5912-300x169.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2022/06/Resize_20220630_091125_5912.jpg 480w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a></li>
</ul>
<h2>यहाँ का आरोही वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सचमुच दर्शनीय है। यहां के निवासियों ने विद्यालय में खेल के मैदान के लिए लंबे संघर्ष के बाद इसे पाया है। यहां के स्थानीय निवासी रोहित ठाकुर का कहना है यदि इस गांव में खेल न होते तो यहाँ मद्यपान और नशे का साम्राज्य होता। इस गाँव के सभी विद्यार्थी व युवा खेलों के लिए अपना समर्पण भाव रखते हैं यही वजह है कि यह गाँव नशे से अछूता है।यदि हिमाचल के गाँवों को देखने का सौभाग्य मिले तो आपको यहाँ पर मंदिरों के प्रति विशेष जुड़ाव देखने को मिलेगा। अधिकांश ग्रामीण हिमाचली आपको अपने ललाट पर तिलक संग मोहक मुस्कान लिए मिलेंगे।</h2>
<h2>पहाड़ों में मैदानी क्षेत्रों से आने वालों के लिए जो एक बाधा है वह यहाँ की संकरी व खड़ी ढाल वाली सड़कों पर अपनी गाड़ी चलाना है! तो बेहतर यही है कि ज्यादा एडवेंचर के चक्कर मे न पड़ें और यहाँ की लोकल टैक्सी कर लें। यदि पैदल चलना चाहें तो आपकी मर्जी।</h2>
<h2></h2>
<h2>काली टिब्बा एक ऐसी ही जगह है। जहाँ जाने के लिए आपको एक सधे हाथ वाले ड्राइवर की जरूरत पड़ेगी। हिमाचल प्रदेश के चायल हिल स्टेशन में काली टिब्बा मंदिर स्थित है। इस मंदिर में 5 शिवलिंग स्थापित हैं। यहां का मुख्य मंदिर मां काली का है। जिसे वर्ष 2002 में बनाया गया था। इससे पहले यहां पर मां काली की पिण्डी के रूप में स्थापना हुई थी। यहां पर पंचमुखी हनुमान मन्दिर, गणेश व शिव मन्दिर के भी कई मंदिर हैं। मंदिर में कई प्रकार के खूबसूरत पत्थर देखने को मिलते हैं। यह मंदिर चारों ओर से संगमर्मर के पत्थरों से बना हुआ है। अभी बाकी है.. लेकिन जो सबसे खूबसूरत बात है इस जगह में वो है यहाँ का नैसर्गिक सौंदर्य। आप इसे नेपाल के पोखरा के समकक्ष रख सकते हैं। यहाँ आकर आप कभी वापस नहीं जाना चाहेंगे। लेकिन यहाँ दूर दराज तक कोई रहने की व्यवस्था नहीं। आप इस खूबसूरती को अपनी यादों के पिटारे में ले जा सकते हैं।</h2>
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<li>..</li>
</ul>
<h2></h2>
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		<title>सजग भारत स्वस्थ भारत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Jun 2021 09:36:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[pritiraghavchauhan.com /लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[जवान सीमा का प्रहरी है, और सजग भारतीय देश का राष्ट्र इस समय अत्यंत कष्टकारी संकट से गुजर रहा है, हम सभी देशवासियों को मिलजुलकर एक दूसरे की मदद करनी होगी, तब ही इस संकट से जल्द जल्द निकला जा सकता है। कोरोना वायरस रोग 2019 (कोविड-19) के प्रसार और इसके आगे के प्रकोप को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_2096" aria-describedby="caption-attachment-2096" style="width: 300px" class="wp-caption alignright"><a href="http://https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-scaled.jpg"><img loading="lazy" class="size-medium wp-image-2096" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-300x249.jpg" alt="सजग भारत स्वस्थ भारत " width="300" height="249" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-300x249.jpg 300w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-1024x851.jpg 1024w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-768x638.jpg 768w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-1536x1277.jpg 1536w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-2048x1703.jpg 2048w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-696x579.jpg 696w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-1068x888.jpg 1068w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/06/PSX_20210607_143558-505x420.jpg 505w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a><figcaption id="caption-attachment-2096" class="wp-caption-text">टीको लगवा ले री माई लड़नो कोरोना सू है</figcaption></figure>
<h3><strong>जवान सीमा का प्रहरी है, और सजग भारतीय देश का</strong></h3>
<h3><strong>राष्ट्र इस समय अत्यंत कष्टकारी संकट से गुजर रहा है, हम सभी देशवासियों को मिलजुलकर एक दूसरे की मदद करनी होगी, तब ही इस संकट से जल्द जल्द निकला जा सकता है। कोरोना वायरस रोग 2019 (कोविड-19) के प्रसार और इसके आगे के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए लागू किए गए अनियोजित लॉकडाउन ने ऐसे लाखों लोगों के जीवन में एक आर्थिक तबाही मचा दी है जो अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं– इनमें न केवल दिहाड़ी मज़दूर हैं बल्कि अनियमित अर्थव्&#x200d;यवस्&#x200d;था में काम करने वाले मजदूर भी हैं। </strong></h3>
<h3><strong>आर्थिक सहायता</strong></h3>
<h3><strong> समाज का एक वर्ग अभाव मे जी रहा है और आवश्यक संसाधनों की कमी से जूझ रहा है. उन्हें हमारे सहयोग की आवश्यकता है. आइये हम सब मिल कर प्रदेश के जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंचाने में सहयोग करें। आपका सहयोग संकट के इस समय में प्रदेश को मज़बूत बनाएगा | आप आर्थिक, राशन सहायता के अलावा वस्तुओ के साथ श्रमदान भी कर सकते हैं</strong></h3>
<h3></h3>
<h3><strong>सोशल मीडिया द्वारा सद् विचारों से सहायता </strong></h3>
<h3><strong>             &#8220;चढ़ै ताप या मूंड पिरावे, डॉक्टर से उपचार करावै!हम दिन रात तरह तरह-तरह के संदेशों का आदान प्रदान करते हैं। लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुँचा कर हम अपने राष्ट्र के सजग नागरिक कहलाएँगे। </strong></h3>
<h3><strong>जैसे कि… </strong></h3>
<h3><strong>मास्क की महत्ता सभी तक पहुंचाए </strong></h3>
<h3><strong>              तोसू कह रो हूँ बेढंगी, मास्क पहन कै निकले कर</strong></h3>
<h3><strong>            धरी रह जागी री सरपंची, मास्क पहन कै निकले कर</strong></h3>
<h3><strong>&#8220;मोमबत्ती टेस्ट के जरिए घर बैठे ही बहुत आराम   से इस बात का पता लगाया जा सकता है कि आप जो मास्क पहन रहे हैं, वह कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में प्रभावी है या नहीं।इसके लिए आप एक मोमबत्ती को जलाकर रख लें। अब अपने चेहरे पर मास्क पहनकर इस मोमबत्ती को फूंक मारकर बुझाने की कोशिश कीजिए। यदि आपके मुंह से निकली हवा इस मास्क को पारकर मोमबत्ती को बुझा देती है तो समझ जाइए कि आपका मास्क कोरोना वायरस को रोक पाने में सक्षम नहीं है।&#8221;</strong></h3>
<h3><strong> हुक्को मत पीवै रै ताऊ, </strong></h3>
<h3><strong>कोरोना गली गली घूमै</strong></h3>
<h3><strong>लोगों को स्&#x200d;व-अलगाव यानी सेल्फ आइसोलेशन के महत्व के बारे में शिक्षित करें।</strong></h3>
<h3><strong> एक दो तीन चार </strong></h3>
<h3><strong>हाथ धो लो फिर एक बार </strong></h3>
<h3><strong>हाथ धोने, सामाजिक/शारीरिक दूरी का औचित्&#x200d;य, बिना हाथ धोए मुंह, आंखों और नाक को न छूने के बारे में अत्&#x200d;यंत व्यापक संदेश फैलाना आरंभ किया जाए। </strong></h3>
<h3><strong> टीको लगवा ले री माई, लड़नो कोरोना सू है </strong></h3>
<h3><strong>बाद मै कर लीजो कढ़ाई, लड़नो कोरोना सू है </strong></h3>
<h3><strong>प्रत्येक भारतीय तक हमारा ये संदेश पहुंचना जरूरी कि कोविड का टीका जरूर लगवाना है। </strong></h3>
<h3><strong>उपरोक्त तरीकों से हम अपने राष्ट्र की सेवा </strong></h3>
<h3><strong>बखूबी कर सकते हैं। तभी कहलाएगा &#8211; </strong></h3>
<h3><strong>&#8220;सजग भारत स्वस्थ भारत&#8221; </strong></h3>
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		<title>छोटी सी प्रेरणा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Feb 2021 14:58:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[pritiraghavchauhan.com प्रेरणा]]></category>
		<category><![CDATA[अनंतयात्राpritiraghavchauhan.com]]></category>
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					<description><![CDATA[ईमानदारी बड़े और अमीर लोगों में सहजता से मिल सकती है क्योंकि लम्बी अच्छी परवरिश के बाद किसी का ईमानदार होना स्वाभाविक है। यदि एक छोटा बच्चा ऐसा करे तो खुशी दूनी हो जाती है।   ऐसा ही अभी चार रोज पहले हुआ।बात मेवात के ग्राम रेवासन की है। स्कूल में मिड डे मील का मासिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3><strong>ईमानदारी बड़े और अमीर लोगों में सहजता से मिल सकती है क्योंकि लम्बी अच्छी परवरिश के बाद किसी का ईमानदार होना स्वाभाविक है। यदि एक छोटा बच्चा ऐसा करे तो खुशी दूनी हो जाती है। </strong></h3>
<h3><strong> ऐसा ही अभी चार रोज पहले हुआ।बात मेवात के ग्राम रेवासन की है। स्कूल में मिड डे मील का मासिक राशन बांटा जा रहा था। सभी शिक्षक अपने रजिस्टर लिए बैठे थे। बच्चे लाइन में लगे थे। एक आठ वर्ष की लड़की बहुत देर से सिर पर अपना राशन लिए बार बार पंक्ति तोड़ कर भीतर जाने की कोशिश कर रही थी। पर कोई उसे अन्दर नहीं जाने दे रहा था। </strong></h3>
<h3><strong>मुझे भी ऐसा ही लगा जैसा दूसरे सोच रहे थे कि एक बार राशन लेने के बाद फिर दोबारा खड़ी हुई है। मैंने उसे अपने पास बुलाया और कहा-, &#8220;क्या बात है जब तुम्हें राशन मिल गया तो जाती क्यों नहीं?तुम्हें खड़े हुए दो घंटे हो गए।&#8221; </strong></h3>
<h3><strong>उतने बहुत ही धीमी आवाज में कहा, &#8220;राशन वापस करना है।&#8221; </strong></h3>
<h3><strong>&#8220;क्यों करना है? जाओ नहीं चाहिए तो किसी जरूरतमंद को दे देना।&#8221; </strong></h3>
<h3><strong>&#8221; वोऽऽमैडम जी ये मेरो ना सै। मेरो नाज मेरे अब्बा जी ले गए। मैं भी ले गयी। मेरे अब्बा ने कही &#8211; &#8220;मैं राशन ले आयो।&#8221; </strong></h3>
<h3><strong>तो मैं इसलू लौटाने कू आई। कोई भीतर ही ना बड़न दे रौ…&#8221; उसने ये बात इतने मद्धम और डरे स्वर में कही कि समझ ही नहीं आया। बात को समझने के लिए एक बड़ी बच्ची का सहारा लेना पड़ा। और जब बात समझ में आई तो खुशी से मेरा रोम &#8211; रोम सरोबार हो गया। एक गरीब बच्चे की ईमानदारी पर भला कौन न आनंदित होगा। </strong></h3>
<h3></h3>
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		<title>आजादी का मोल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pritiraghavchauhan.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Jan 2021 07:40:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Utprerak Lekh]]></category>
		<category><![CDATA[pritiraghavchauhan.com आजादी का मोल]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; &#160; आजादी  का मोल आजादी का मूल्य क्या है? काश! बता पाता वो शिशु जो माँ की कोख से निकला है अभी..अभी। आधी से ज्यादा आबादी तो जानती ही नहीं आज़ादी किस चिड़िया का नाम है? खाने और पहनने से ज्यादा कुछ जरूरी नहीं है आज की युवा पीढ़ी के लिए नह महान देश- [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<figure style="width: 211px" class="wp-caption alignright"><a href="http:// pritiraghavchauhan.com"><img loading="lazy" class="size-medium wp-image-2043" src="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/01/sketch1491961876266_copy_1005x1428-211x300.png" alt="आजादी का मोल" width="211" height="300" srcset="https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/01/sketch1491961876266_copy_1005x1428-211x300.png 211w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/01/sketch1491961876266_copy_1005x1428-721x1024.png 721w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/01/sketch1491961876266_copy_1005x1428-768x1091.png 768w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/01/sketch1491961876266_copy_1005x1428-696x989.png 696w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/01/sketch1491961876266_copy_1005x1428-296x420.png 296w, https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2021/01/sketch1491961876266_copy_1005x1428.png 1005w" sizes="(max-width: 211px) 100vw, 211px" /></a><figcaption class="wp-caption-text">आजादी का मोल</figcaption></figure>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="font-weight: 400;">आजादी  का मोल</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आजादी का मूल्य क्या है? काश! बता पाता वो शिशु जो माँ की कोख से निकला है अभी..अभी। आधी से ज्यादा आबादी तो जानती ही नहीं आज़ादी किस चिड़िया का नाम है? खाने और पहनने से ज्यादा कुछ जरूरी नहीं है आज की युवा पीढ़ी के लिए नह महान देश- भक्तों के लिए इक जुनून भर था क्या जेल जाना? इतिहास के पन्नों में गाथा बनकर रह गए वो लोग जो भारत माता को ब्रितानिया हुकुमत के जुल्मों से आजाद कर लाए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">किसी भी देश की स्वतंत्रता उस देश के लोगों के मूल्यों में, उसके उच्च आदर्शों में छिपी होती है। हमारा भारत युवा भारत है। आजादी लाने वाले नहीं रहे। वे ये धरोहर अपनी अगली पीढ़ी को सौंप गए। अगली पीढ़ी ने भी इसे बहुत सहेज कर अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखा। लेकिन आज बगडोर युवाओं के हाथ में है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">        आज का युवा वर्ग चाईनीज़ भोजन और आलसी जीवन शैली का दीवाना है। उसकी सोचने समझने की शक्ति आधुनिक गूगल की भेंट चढ़ गई है। स्वतंत्रता का मोल पूछो जरा उनसे… कहेंगे- हक है हमारा। गली &#8211; कूंचों में खड़े होकर अंग्रेजी गालियाँ देना, अंग्रेजी में गिटपिट करना और पास से गुजरने वालों पर हँसना। यही आजादी है क्या? यदि हमारे सामाजिक सरोकार उच्च नहीं हैं। हमारे आदर्श उच्च नहीं तो आजादी बेमानी है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">स्वतंत्रता के मूल्य को पहचानने के लिए हमें अपने मूल्यों को समझना के होगा हमें शिक्षित होना होगा। शिक्षा और कौशल के द्वारा आत्मनिर्भर भारत बनाना होगा। शिक्षा किसी भी राष्ट्र का स्वरूप बदल सकती है।  साठ करोड़ शिक्षित युवा क्या नहीं कर सकते? हमें सुशिक्षित व सम्पन्न होना होगा।</span> होना<span style="font-weight: 400;"> ही होगा और शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कुछ दीवानों ने जंग लड़ी,</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कुछ हमें जुनूनी बनना है</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अब रुकना ना है क्षण भर को</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सर्वस्व समर्पण करना है</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अपने भारत के लिए हमें सर्वस्व समर्पण करना होगा कार्य छोटा हो या बड़ा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है तो इस बात से कि आप अपने कार्य के प्रति कितने इमानदार हैं। इसीलिए बस इमानदारी से अपने काम करते जाएँ और न भी हों तो नए कार्यों की धरती तैयार करें। यही असली आजादी है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;"> </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;"> सबसे बड़े लोकतंत्र को भीड़तंत्र बनने से बचाना ही आजादी है। ऐसा तभी संभव है जब हमारे युवा और बच्चे जिज्ञासु हों। ज्ञान पिपासु हों। ब्राउजिंग ही करनी हो तो करें .. लेकिन ज्ञान और नवीनतम तकनीक की करें। जो आपके साथ देश को प्रगति के नए पायदान पर ले जाए। जिन अंग्रेजों से आजादी पाने में हमने लम्बा समय लगा दिया उन्हीं के द्वारा छोड़ी चीज़ों को हम ओढ़ते बिछाते हैं! स्वदेशी बनें। सिर्फ तिरंगा नहीं स्वदेशी तकनीक एक आंदोलन के रूप में उभरे। देश की प्रगति के लिए मजबूत अर्थतंत्र बनाना ही होगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हुकमते ब्रितानिया की छाह से भी दूर हो</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">यहाँ का बाशिंदा कोई न कभी मजबूर हो </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हिन्द की धरती पर हिन्दोस्तानी एक हों</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अंग्रेजियत से दूर हिंदी सभी का नूर ह</span></p>
]]></content:encoded>
					
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