संजय तुम कहाँ हो

Guest Teachers Protest

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संजय तुम कहाँ हो

ज्येष्ठ माह

जब सर ढक कर चलना

मजबूरी हो जाती है

उसी ज्येष्ठ माह में

पहले एक विधवा ने

अपना सर मुंडवाया

भीड़ रोई प्रजातंत्र मुस्कुराया

अब हरियाणा में चौबीस

सिरफिरे शिक्षकों ने

अपने सर को आगे बढ़ाया

 पच्चीस चाँद देख

लोक तंत्र जबड़े भींच कसमसाया

अब अतिथि शिक्षक प्रदेश में

घुटमुंडे मिलेंगे

धृतराष्ट्र तो अंधे हैं

संजय तुम कहाँ हो???

कुछ बोलते क्यों नहीं!!!

VIAPritiraghavchauhan
SOURCEPritiraghavchauhan
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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