अब वो चिड़िया नहीं आती

जो आती थी कल तलक

शीशे के दर पर

जो पटकती थी सर

आइने से घर पर

अब वो चिड़िया नहीं आती

उसे अहसास है शायद

वहाँ उसका घर नहीं

दर नहीं

कुछ स्वर हैं

जो बंद हैं उस

शीशे के मकान के भीतर….

अब वो चिड़िया नहीं आती..

VIAPriti Raghav Chauhan
SOURCEpritiraghavchauhan
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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