फोन का उपवास

0
20

#फोन चलो आज फोन का उपवास करते हैं

https://pritiraghavchauhan…

चलो आज फोन का उपवास करते हैं
https://pritiraghavchauhan.com/wp-content/uploads/2023/08/3_20230820_074743_0002.png

चलो आज फोन का उपवास करते हैं

 

 

चलो आज फोन का उपवास करते हैं

 नहीं देखेंगे व्हाट्सएप चैट

 ना देखेंगे कोई स्टेटस  

चेहरे वाली किसी किताब को नहीं बांचना 

ना किसी स्टोरी खिड़की में झांकना 

रीलों से आज तौबा 

 इंस्टाग्राम से परे हट 

स्वयं का विकास करते हैं 

चलो आज फोन का उपवास करते हैं 

कुछ योग कपालभाति

सुनें नगमें नाना भांति 

चिड़ियों को सुनें, बच्चों को गुनें

घरवालों से तकरार 

फिर मानमनुहार

पास की सड़कों पर भर कुलांचे

 पड़ोसियों से छोटी मुलाकात करते हैं 

चलो आज फोन का उपवास करते हैं 

पोंछते हैं शीशे खिड़कियों के

लाते हैं कुछ और उजाले

दरवाजों के कब्जों में डालते हैं तेल

चलो हटाते हैं जाले

 पौधों की सुध लें 

कपड़ों के अंबार को देखें 

कोने सभी सजा लें

घर से कतारें चींटियों की साफ करते हैं 

चलो आज फोन का उपवास करते हैं 

‘प्रीति राघव चौहान’

 

 

 

 

 

 

SHARE
Previous articleतीज
Next articleहिन्दी में अल्पज्ञ ए आई
नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

LEAVE A REPLY