ईमानदारी बड़े और अमीर लोगों में सहजता से मिल सकती है क्योंकि लम्बी अच्छी परवरिश के बाद किसी का ईमानदार होना स्वाभाविक है। यदि एक छोटा बच्चा ऐसा करे तो खुशी दूनी हो जाती है। 

 ऐसा ही अभी चार रोज पहले हुआ।बात मेवात के ग्राम रेवासन की है। स्कूल में मिड डे मील का मासिक राशन बांटा जा रहा था। सभी शिक्षक अपने रजिस्टर लिए बैठे थे। बच्चे लाइन में लगे थे। एक आठ वर्ष की लड़की बहुत देर से सिर पर अपना राशन लिए बार बार पंक्ति तोड़ कर भीतर जाने की कोशिश कर रही थी। पर कोई उसे अन्दर नहीं जाने दे रहा था। 

मुझे भी ऐसा ही लगा जैसा दूसरे सोच रहे थे कि एक बार राशन लेने के बाद फिर दोबारा खड़ी हुई है। मैंने उसे अपने पास बुलाया और कहा-, “क्या बात है जब तुम्हें राशन मिल गया तो जाती क्यों नहीं?तुम्हें खड़े हुए दो घंटे हो गए।” 

उतने बहुत ही धीमी आवाज में कहा, “राशन वापस करना है।” 

“क्यों करना है? जाओ नहीं चाहिए तो किसी जरूरतमंद को दे देना।” 

” वोऽऽमैडम जी ये मेरो ना सै। मेरो नाज मेरे अब्बा जी ले गए। मैं भी ले गयी। मेरे अब्बा ने कही – “मैं राशन ले आयो।”

तो मैं इसलू लौटाने कू आई। कोई भीतर ही ना बड़न दे रौ…” उसने ये बात इतने मद्धम और डरे स्वर में कही कि समझ ही नहीं आया। बात को समझने के लिए एक बड़ी बच्ची का सहारा लेना पड़ा। और जब बात समझ में आई तो खुशी से मेरा रोम – रोम सरोबार हो गया। एक गरीब बच्चे की ईमानदारी पर भला कौन न आनंदित होगा। 

VIAPritiRaghavChauhan
SOURCEप्रीति राघव चौहान
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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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