किताबें

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किताबों में किस्से हैं

किताबें

किताबों में किस्से हैं

किताबों में किस्से हैं कलमा है चौपाई भी

तेरी मेरी इसकी उसकी सी लगती कविताई भी

किताबों में कल है रोमांचक पल हैं

काले हर्फ़ों में लिखें जो रंगी सरल हैं

किताबों में रंग हैं जीने के ढंग हैं

खुशनुमा पलों की उड़ती हुई पतंग हैं

किताबों में गीत हैं बिछुड़े  हुए मनमीत हैं

चाय संग तकरार करते हुए संगीत हैं

किताबों में धर्म है किताबों में कर्म है

तमाम कायनातों का छिपा हुआ मर्म है

किताबों में मैं है किताबों में मय है

ताक पर करीने से लगी हर शय है

किताबों में फूल है किताबों में धूल है

तितली के परों सी छिपाई गई भूल है

किताबों में है आदि किताबों में अंत है

जीते जी जो संगी है संग मृत्यु पर्यंत है

‘प्रीति राघव चौहान’

 

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नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

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