आजादी क्या मिली वो स्वच्छंद हो गये

आजादी.. Aajadi....

0
1423

आजादी क्या मिली

वो स्वच्छंद हो गये

कतारों में लगे लोग

लामबंद हो गये

हांकने वाले भी थे

हुजूम में शामिल

आजाद तराने गलों

 में बंद हो गए

जलसा जुलूस में

तब्दील हो गया

जय हिंद के नारे

 बुलंद हो गये

उस शोरगुल में अपनी

 बारी का इंतजार

करती रही दिलशाना

 गुम छंद हो गये

हवा हुईं पतंगें गुब्बारों

 पर निकला गुबार

सैल्फी पसंद साथी

दानिशमंद हो गये

इस मुल्क की बेचारगी

  तो देखिये जनाब

विद्यालय मेरे गांव के

   देव बन्द हो गये

         “ प्रीति राघव चौहान”

 

VIAPriti Raghav Chauhan
SOURCEPriti Raghav Chauhan
SHARE
Previous articleआज शांत बहुत शांत है मन
Next articleकंदीलें
नाम:प्रीति राघव चौहान शिक्षा :एम. ए. (हिन्दी) बी. एड. एक रचनाकार सदैव अपनी कृतियों के रूप में जीवित रहता है। वह सदैव नित नूतन की खोज में रहता है। तमाम अवरोधों और संघर्षों के बावजूद ये बंजारा पूर्णतः मोक्ष की चाह में निरन्तर प्रयास रत रहता है। ऐसी ही एक रचनाकार प्रीति राघव चौहान मध्यम वर्ग से जुड़ी अनूठी रचनाकार हैं।इन्होंने फर्श से अर्श तक विभिन्न रचनायें लिखीं है ।1989 से ये लेखन कार्य में सक्रिय हैं। 2013 से इन्होंने ऑनलाइन लेखन में प्रवेश किया । अनंत यात्रा, ब्लॉग -अनंतयात्रा. कॉम, योर कोट इन व प्रीतिराघवचौहान. कॉम, व हिन्दीस्पीकिंग ट्री पर ये निरन्तर सक्रिय रहती हैं ।इनकी रचनायें चाहे वो कवितायें हों या कहानी लेख हों या विचार सभी के मन को आन्दोलित करने में समर्थ हैं ।किसी नदी की भांति इनकी सृजन क्षमता शनै:शनै: बढ़ती ही जा रही है ।

LEAVE A REPLY